जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: CCTV फुटेज से दूरी क्यों? DM कार्यालय के किस कर्मचारी की शह पर सुनील कुमार को हटाया गया?

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: CCTV फुटेज से दूरी क्यों? DM कार्यालय के किस कर्मचारी की शह पर सुनील कुमार को हटाया गया?

जौनपुर। जनपद में आईटीआई परीक्षाओं के दौरान चल रहे कथित अवैध उगाही और सामूहिक नकल के खेल में अब जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सिद्दीकपुर स्थित राजकीय नोडल आईटीआई कॉलेज सहित शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) परीक्षा केंद्रों पर पैसे लेकर सामूहिक नकल कराने और 2000 रुपये प्रति छात्र अवैध वसूली के संगीन आरोपों के बाद भी निष्पक्ष जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति देखने को मिल रही है।
प्रशासनिक मौन: सीसीटीवी फुटेज से दूरी पर उठे सवाल
जनसामान्य और पीड़ित छात्रों का सबसे तीखा सवाल यह है कि जब पूरी परीक्षा सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आयोजित हो रही थी, तो इतने गंभीर मामले में अधिकारियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज को अभिरक्षा में लेकर उसकी बारीकी से तकनीकी जांच क्यों नहीं की गई? क्या कैमरों के साक्ष्यों से दूरी बनाना नकल कराने वाले गिरोह और नोडल प्रबंधन को बचाने की सोची-समझी रणनीति है?
सुनील कुमार को बार-बार हटाने की साजिश: न्यायालयी आदेश के बावजूद हटाया गया
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला प्रशासनिक षड्यंत्र सिद्दीकपुर आईटीआई स्कूल के कर्मचारी सुनील कुमार को हटाए जाने के मामले में सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आईटीआई स्कूल प्रशासन और नोडल प्रबंधन सुनील कुमार को बार-बार संस्थान से हटाना चाहता है।
गौरतलब है कि पूर्व में भी सुनील कुमार का स्थानांतरण कराया गया था, जिस पर माननीय न्यायालय से आदेश प्रभावी है। स्थानांतरण के संबंध में न्यायालयी आदेश होने के बावजूद, ऐन परीक्षा के समय सुनील कुमार को स्कूल से हटाकर निर्वाचन कार्य में लगा दिया गया। सवाल उठता है कि आखिर सुनील कुमार से आईटीआई स्कूल प्रशासन को इतनी असहजता क्यों है? वह कौन सा सच है जिसे दबाने के लिए न्यायालयी आदेश के बावजूद उन्हें बार-बार रास्ते से हटाने की साजिश रची जाती है? क्या सुनील कुमार परीक्षा में हो रही धांधली और अवैध वसूली के रास्ते में रोड़ा बन रहे थे?
DM कार्यालय का कौन सा कर्मचारी है नकल गिरोह का सहयोगी?
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि बिना जिलाधिकारी (DM) कार्यालय के किसी अंदरूनी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता के, किसी स्कूल कर्मचारी की ड्यूटी सीधे निर्वाचन कार्यालय में लग ही नहीं सकती।
अब जौनपुर के प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि डीएम ऑफिस का वह कौन सा कर्मचारी या अधिकारी है जो आईटीआई स्कूल के नकल कराने वाले गिरोह का सक्रिय सहयोगी बना हुआ है? किसके कहने और सिफारिश पर आईटीआई कर्मचारी सुनील कुमार की फाइल निर्वाचन शाखा में भेजी गई? यदि शासन-प्रशासन निष्पक्षता से इस बात की जांच करा ले कि डीएम कार्यालय की स्थापना या निर्वाचन शाखा के किस पटल अधिकारी ने नोडल प्रबंधन के इशारे पर यह पत्रावली आगे बढ़ाई, तो शिक्षा माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच फैले इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश हो जाएगा।
नोडल अधिकारी की भूमिका पर गहराता संशय
सिद्दीकपुर आईटीआई के प्रधानाचार्य और जिले के नोडल अधिकारी मनीष पाल पर पूर्व से ही अपने पसंदीदा प्रभारियों की तैनाती करने और व्यवस्था को अपने अनुकूल संचालित करने के आरोप लग रहे हैं। जिस प्रकार से परीक्षा के दौरान सीसीटीवी फुटेज से दूरी बनाई गई और डीएम दफ्तर से सांठगांठ कर न्यायालयी आदेश के बावजूद सुनील कुमार को निर्वाचन ड्यूटी के नाम पर हटवाया गया, उससे यह साफ हो जाता है कि नकल कराने वाले गिरोह की क्षमता इतनी ज्यादा है कि वह प्रशासनिक तंत्र को भी अपनी उंगलियों पर नचा रहा है।
निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग
यदि जिला प्रशासन अपने ही कार्यालय के भीतर सक्रिय इस काली भेड़ की पहचान नहीं करता और परीक्षा की शुचिता को नजरअंदाज किया जाता है, तो जौनपुर में निष्पक्ष परीक्षाओं की उम्मीद करना बेमानी होगा।
अब जौनपुर की जनता, पीड़ित छात्र और सामाजिक संगठन यह मांग कर रहे हैं कि:
पहला, शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव केंद्रों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तत्काल जब्त की जाए।
दूसरा, इस बात की उच्च स्तरीय जांच हो कि डीएम कार्यालय के किस कर्मचारी के इशारे पर न्यायालय के आदेश की अनदेखी करते हुए सुनील कुमार को निर्वाचन कार्य में लगाया गया।
तीसरा, इस पूरे नेक्सस को चिन्हित कर दोषी अधिकारियों, नोडल प्रबंधन और नकल माफियाओं पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, सूत्रों से मिली जानकारी और प्रशासनिक घटनाक्रमों पर आधारित है। मामले में नोडल प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष का सदैव स्वागत है।)

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