जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: SDM की जांच बनी महज खानापूर्ति, CCTV फुटेज से दूरी क्यों? DM कार्यालय के किस अधिकारी के इशारे पर लगा कर्मचारी चुनाव ड्यूटी पर?

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

जौनपुर ITI परीक्षा घोटाला: SDM की जांच बनी महज खानापूर्ति, CCTV फुटेज से दूरी क्यों? DM कार्यालय के किस अधिकारी के इशारे पर लगा कर्मचारी चुनाव ड्यूटी पर?

जौनपुर। जनपद में आईटीआई परीक्षाओं के दौरान चल रहे कथित अवैध उगाही और सामूहिक नकल के खेल में प्रशासनिक जांच प्रणाली पूरी तरह कटघरे में खड़ी हो गई है। सिद्दीकपुर स्थित राजकीय नोडल आईटीआई कॉलेज सहित शाहगंज और उसरांव (मड़ियाहूं) परीक्षा केंद्रों पर पैसे लेकर सामूहिक नकल कराने और 2000 रुपये प्रति छात्र अवैध वसूली के संगीन आरोपों के बाद शासन-प्रशासन की नींद तो खुली, लेकिन जांच के नाम पर जो हुआ उसने पूरी व्यवस्था की नीयत पर पानी फेर दिया है।
प्रशासनिक खानापूर्ति: एसडीएम की जांच पर उठे सवाल
सूत्रों से प्राप्त विवरण के अनुसार, इन अति-संवेदनशील आरोपों की जमीनी हकीकत परखने के लिए शाहगंज एसडीएम, सदर एसडीएम और मड़ियाहूं एसडीएम को संबंधित परीक्षा केंद्रों पर जांच हेतु भेजा गया था। प्रशासनिक लवाजमे के साथ अधिकारियों का निरीक्षण केवल औपचारिकता और कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह गया। जनसामान्य और जागरूक नागरिकों का सबसे तीखा सवाल यह है कि जब पूरी परीक्षा सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आयोजित हो रही थी, तो इतने गंभीर मामले में जांच अधिकारियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज को अभिरक्षा में लेकर उसकी बारीकी से जांच क्यों नहीं की गई? क्या कैमरों के साक्ष्यों से दूरी बनाना किसी खास सिंडिकेट को बचाने की कोशिश है?
DM कार्यालय के किस अधिकारी की शह? चुनाव ड्यूटी के खेल से खुलेगा नेक्सस
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू सिद्दीकपुर आईटीआई कॉलेज के एक कर्मचारी के स्थानांतरण से जुड़ा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, परीक्षा के ठीक दौरान सिद्दीकपुर स्कूल के एक कर्मचारी को कथित तौर पर निर्वाचन (चुनाव) ड्यूटी के नाम पर वहां से हटा दिया गया।
अब इस मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिलाधिकारी (DM) कार्यालय के किस अधिकारी या कर्मचारी की सिफारिश और कहने पर आईटीआई सिद्दीकपुर के उस कर्मचारी को ऐन परीक्षा के समय चुनाव ड्यूटी पर लगाया गया? यदि शासन-प्रशासन निष्पक्षता से इस बात की जांच करा ले कि डीएम कार्यालय की स्थापना या निर्वाचन शाखा के किस पटल अधिकारी ने नोडल प्रबंधन के इशारे पर यह फाइल आगे बढ़ाई थी, तो शिक्षा माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच फैले इस पूरे नेक्सस की परतें खुद-ब-खुद खुल जाएंगी। यह घटना दर्शाती है कि नकल कराने वाले गिरोह की पहुंच जिला प्रशासन के भीतर तक है, जो अपनी सुविधा के हिसाब से कर्मचारियों का फेरबदल करवा रहा है।
नोडल अधिकारी और डायरेक्टर की भूमिका पर गहराता संशय
सिद्दीकपुर आईटीआई के प्रधानाचार्य और जिले के नोडल अधिकारी मनीष पाल पर पूर्व से ही चहेते प्रभारियों की तैनाती और व्यवस्था को अपने अनुकूल संचालित करने के आरोप लग रहे हैं। अब जिस तरह से एसडीएम स्तर की जांच में केवल खानापूर्ति की गई, सीसीटीवी फुटेज की तकनीकी स्क्रूटनी से परहेज किया गया और डीएम दफ्तर से कर्मचारी को हटवाया गया, उससे यह आशंका और प्रबल होती है कि इस कथित नकल रैकेट को विभागीय शीर्ष अधिकारियों और राजनैतिक रसूखदारों का सीधा संरक्षण हासिल है।
जिला प्रशासन की चुप्पी और निष्पक्ष जांच की मांग
यदि उप जिलाधिकारियों की जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी और डीएम कार्यालय के भीतर सक्रिय तत्वों की पहचान नहीं होगी, तो फिर निष्पक्ष परीक्षा की उम्मीद किससे की जाए?
अब जौनपुर की जनता, पीड़ित छात्र और सामाजिक संगठन यह मांग कर रहे हैं कि जिला प्रशासन खानापूर्ति वाली जांच को खारिज कर शाहगंज, सिद्दीकपुर और उसरांव केंद्रों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तत्काल जब्त करे। इसके साथ ही, इस बात की भी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए कि डीएम कार्यालय के किस अधिकारी के कहने पर सिद्दीकपुर स्कूल के कर्मचारी को चुनाव ड्यूटी में भेजा गया था, ताकि इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
(नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों, सूत्रों से मिली जानकारी और प्रशासनिक घटनाक्रमों पर आधारित है। मामले में नोडल प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष का सदैव स्वागत है।)

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