जौनपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: फर्जी आधार कार्ड से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के 3 सदस्य गिरफ्तार, ₹92 हजार नकद बरामद

आलोक वर्मा, जौनपुर, ब्यूरो,

जौनपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: फर्जी आधार कार्ड से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के 3 सदस्य गिरफ्तार, ₹92 हजार नकद बरामद

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद में साइबर पुलिस ने एक संगठित वित्तीय अपराध गिरोह के विरुद्ध बड़ी सफलता प्राप्त की है। विशेष अभियान ‘Cy-Vajra’ के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम थाना/सेल की टीम ने तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध लेन-देन की गतिविधियों में लिप्त थे। पुलिस टीम ने आरोपियों के पास से ₹92,000 की नकद राशि, 10 फर्जी आधार कार्ड तथा दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह के दिशा-निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) आयुष श्रीवास्तव तथा क्षेत्राधिकारी (नगर) गोल्डी गुप्ता के पर्यवेक्षण में इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। मुखबिर से प्राप्त सटीक सूचना के आधार पर साइबर क्राइम थाने की टीम ने गुरुवार प्रातः सिटी रेलवे स्टेशन ओवरब्रिज के समीप घेराबंदी कर तीनों अभियुक्तों को उस समय हिरासत में लिया, जब वे जिले से पलायन करने के प्रयास में थे।
प्राथमिक पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि इस संगठित नेटवर्क का मुख्य संचालक (सरगना) दीपेश उर्फ दीपु है। यह गिरोह ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से अर्जित की गई अवैध राशि को विभिन्न छद्म बैंक खातों में स्थानांतरित करता था। पकड़े गए आरोपी इन खातों से एटीएम के माध्यम से नकद निकासी सुनिश्चित करते थे और कुल निकासी राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा मुख्य सरगना को हस्तांतरित कर शेष 20 प्रतिशत राशि आपस में बांट लेते थे। जांच में स्पष्ट हुआ कि गिरोह अपनी वास्तविक पहचान छिपाने और अवैध बैंक खाते संचालित करने के लिए बड़े पैमाने पर कूटरचित (फर्जी) आधार कार्डों का उपयोग कर रहा था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निशानदेही पर इस गिरोह से जुड़े कई अन्य संदिग्धों को चिन्हित किया गया है। फरार मुख्य सरगना दीपेश की गिरफ्तारी हेतु पुलिस की विशेष टीमें विभिन्न संभावित ठिकानों पर निरंतर दबिश दे रही हैं। साइबर क्राइम सेल ने आम नागरिकों को सचेत किया है कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, गोपनीय ओटीपी अथवा निजी पहचान पत्र साझा न करें, क्योंकि ऐसा करना वित्तीय अपराध में सह-अभियुक्त बनाने का आधार बन सकता है। किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में नागरिक तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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