ब्यूरो,
लखनऊ अग्निकांड मामला : आईएएस अफसरों को दोषी ठहराने की सूचना भ्रामक
लखनऊ।
अलीगंज अग्निकांड के मामले में दोषी आईएएस अधिकारियों का भी नाम शासन और मामले की जांच कर रही एसआईटी टीम को भेजे जाने की चर्चाओं को एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि शासन ने उनसे वर्ष 2016 से 2025 के बीच एलडीए में तैनात रहे अधिकारियों की जानकारी मांगी थी, जो दो सप्ताह पहले ही भेजी जा चुकी है। जानकारी भेजने का मतलब यह नहीं है कि किसी को आरोपी बताया गया है।
शासन की ओर से बनाई गई दो सदस्यीय एसआईटी ने जांच को लेकर ही एलडीए से जानकारियां मांगी थीं। 20 जून को हुई अग्निकांड की घटना के बाद 22 को एलडीए ने दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद 23 को 16 और इंजीनियरों, जोनल अफसरों और विहित प्राधिकारियों की सूची शासन को भेजी थी। फिर 24 को एलडीए ने उन छह पीसीएस अफसरों के नाम शासन को भेजे थे, जो उस दौरान अलीगंज क्षेत्र का काम देख रहे थे। इसके बाद एलडीए की ओर कोई और सूची नहीं भेजी गई। हालांकि, यह चर्चा 26 जून को आई थी कि 100 और कर्मचारियों-अधिकारियों की सूची भेजी गई, जो इस दौरान तैनात रहे। हालांकि, एलडीए की ओर से कहा गया है कि ऐसा नहीं है।
जांच में एलडीए की भूमिका नहीं
कुछ और आईएएस अफसरों के नाम भेजे जाने की चर्चाओं को लेकर एलडीए वीसी ने साफ किया कि किसी भी आईएएस या मौजूदा डीएम का नाम अग्निकांड मामले में आरोपी के तौर पर नहीं भेजा गया है। नाम भेजे जाने की चर्चा निराधार है। मामले में कौन आरोपी होगा यह एसआईटी की जांच में तय होगा, एलडीए की इसमें कोई भूमिका नहीं है। सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच एलडीए में तैनात रहे पीसीएस अफसरों की संख्या 20 के करीब होगी। इनमें से छह कौन हैं, इसकी जानकारी अभी बाहर नहीं आई है। ये वर्तमान में एडीएम रैंक के अफसर हैं और अलग-अलग जगहों पर तैनात हैं। पीसीएस अफसरों के नाम कार्रवाई के लिए भेजे गए हैं इसकी पुष्टि तो एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने की, पर नाम बताने से इन्कार कर दिया।