Alok Verma, Jaunpur Bueauro,
पत्रकार की जमीन पर दबंगों ने किया कब्जा, मड़ियाहूं एसडीएम और तहसीलदार नहीं कर रहे कार्रवाई; मुख्यमंत्री की सख्ती के बावजूद जौनपुर में भू-माफियाओं के हौसले बुलंद
जौनपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ चलाए जा रहे कड़े अभियान और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को जौनपुर में तगड़ा झटका लग रहा है। शासन स्तर से भू-माफियाओं पर बुलडोज़र चलाने और जमीनों को तत्काल कब्जामुक्त कराने के सख्त निर्देश हैं, लेकिन जौनपुर का स्थानीय प्रशासन इस मामले में पूरी तरह ढीला और सुस्त नजर आ रहा है। आलम यह है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध कब्जे के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और पीड़ित न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
मड़ियाहूं के सिंगारपुर में पत्रकार की जमीन पर दबंगों का कब्जा, नहीं हो रही कोई सुनवाई
प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा और हैरान करने वाला मामला मड़ियाहूं तहसील के सिंगारपुर ग्राम से सामने आया है, जहां चौथे स्तंभ यानी मीडिया से जुड़े व्यक्ति को ही निशाना बना लिया गया। ‘अवध केसरी जौनपुर’ के संवाददाता आलोक वर्मा, जो कि इसी सिंगारपुर ग्राम के निवासी हैं, उनकी पैतृक जमीन पर क्षेत्र के दबंगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। एक सजग पत्रकार द्वारा मामले की शिकायत स्थानीय प्रशासन से कई बार की गई, लेकिन मड़ियाहूं के उपजिलाधिकारी (SDM) और तहसीलदार ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जब लोकतंत्र के प्रहरी की ही शिकायत पर जिम्मेदार अधिकारी केवल टालमटोल कर रहे हैं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
मड़ियाहूं तहसील में अधिकारियों की घोर लापरवाही, नहीं हो रही कोई सुनवाई
मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। मड़ियाहूं में तैनात एसडीएम और तहसीलदार मुख्यमंत्री के कड़े आदेशों को ठेंगा दिखाने में जुटे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और पीड़ितों का आरोप है कि अवैध जमीन कब्जे की दर्जनों शिकायतों के बावजूद मड़ियाहूं के ये जिम्मेदार अधिकारी और राजस्व कर्मचारी मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। पैमाइश और बेदखली के आदेश होने के बाद भी महीनों तक फाइलें दबी रहती हैं, जिससे साफ पता चलता है कि मड़ियाहूं प्रशासन अवैध कब्जाधारकों के सामने पूरी तरह नतमस्तक हो चुका है।
लेखपाल, कानूनगो और नायब तहसीलदार की मनमानी चरम पर, बिना अवैध वसूली नहीं हिलती फाइल
क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि मड़ियाहूं तहसील के भीतर लेखपाल, कानूनगो (राजस्व निरीक्षक) और नायब तहसीलदार की मनमानी इस समय चरम पर पहुंच चुकी है। पीड़ितों का कहना है कि जमीन की पैमाइश करनी हो, विवादित स्थल की रिपोर्ट लगानी हो या फिर बेदखली की कार्रवाई को आगे बढ़ाना हो—बिना मोटी अवैध वसूली (सुविधा शुल्क) के कोई भी काम नहीं किया जा रहा है। जो फरियादी पैसे देने में असमर्थ हैं, उनकी फाइलों को महीनों तक लटका कर रखा जाता है या फिर विपक्षियों से सांठगांठ कर मामले को पूरी तरह रफा-दफा कर दिया जाता है। इस खुले खेल से गरीब और सीधे-साधे काश्तकार पूरी तरह टूट चुके हैं।
लापरवाह कर्मचारी और राजस्व टीम की सांठगांठ से हौसले बुलंद
पीड़ितों का कहना है कि मड़ियाहूं तहसील के लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी शिकायतों पर मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच करने के बजाय दफ्तर में बैठकर ही फर्जी आख्या रिपोर्ट लगा देते हैं। हलका लेखपाल और कानूनगो की कथित ढुलमुल कार्यशैली और सांठगांठ के चलते अवैध कब्जा करने वाले दबंगों और भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। सीधे-साधे और गरीब काश्तकारों को अपनी ही पैतृक जमीन बचाने के लिए तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन मड़ियाहूं के लापरवाह अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
शासन की छवि खराब कर रहे मड़ियाहूं के जिम्मेदार
एक तरफ जहां सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ हर मंच से एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स को सक्रिय करने और सरकारी व निजी जमीनों से अवैध कब्जे तुरंत हटाने की बात करते हैं, वहीं मड़ियाहूं तहसील के इन लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों का यह रवैया सरकार की साख पर बट्टा लगा रहा है। त्रस्त और परेशान जनता ने अब जिलाधिकारी (DM) और शासन स्तर के उच्चाधिकारियों से मड़ियाहूं के इस लापरवाह तंत्र पर नकेल कसने और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।