Alok Verma, Jaunpur Bueauro,
डीएम की सख्ती के बावजूद जौनपुर कलेक्ट्रेट में अधिकारियों और कर्मचारियों की बेखौफ वसूली, मन से गायब हुआ कानून का डर
जौनपुर। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और कलेक्ट्रेट परिसर की व्यवस्था सुधारने के लिए जिलाधिकारी (DM) द्वारा बरती जा रही तमाम सख्ती के बावजूद, कलेक्ट्रेट के कुछ विभागों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं। हालत यह हो गई है कि इन घूसखोरों के मन से न तो प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर रह गया है और न ही आला अधिकारियों के औचक निरीक्षण का। कलेक्ट्रेट के विभिन्न पटलों पर आज भी जनता से काम के बदले खुलेआम सुविधा शुल्क (वसूली) का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
सूत्रों और कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले पीड़ित नागरिकों के अनुसार, असलहा अनुभाग पटल, भूलेख अनुभाग, आपदा राहत, विभिन्न प्रमाण पत्रों के सत्यापन और राजस्व से जुड़े विभागों में बिना लेन-देन के फाइलें आगे नहीं सरकतीं। सीधे-साधे ग्रामीणों और फरियादियों को छोटे-छोटे कामों या दस्तखत के लिए हफ्तों दौड़ाया जाता है और जब वे परेशान हो जाते हैं, तो बिचौलियों या सीधे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से मोटी रकम की मांग की जाती है।
जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में कई बार लापरवाह और दागी स्टाफ के खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच जैसी सख्त कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद, कलेक्ट्रेट के भीतर सक्रिय यह सिंडिकेट पूरी तरह बेखौफ है। परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बाद भी गुप्त रूप से या दफ्तरों के कमरों के पीछे यह अवैध वसूली का धंधा बिना किसी डर के संचालित हो रहा है, जिससे कलेक्ट्रेट प्रशासन की साख पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
दूर-दराज के गांवों से अपनी फरियाद लेकर कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों का कहना है कि एक तरफ जिलाधिकारी जनसुनवाई करके लोगों को न्याय दिलाने का प्रयास करते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनकी नाक के नीचे बैठे ये जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पूरी व्यवस्था को बदनाम कर रहे हैं। जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि ऐसे भ्रष्ट लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ न सिर्फ निलंबन, बल्कि सीधे विजिलेंस जांच और एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर उन्हें जेल भेजा जाए, तभी कलेक्ट्रेट में इस खुली वसूली पर लगाम लग सकेगी।