चोरी की एफआईआर के लिए दर-दर भटक रहा है रिटायर्ड पुलिसकर्मी

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

चोरी की एफआईआर के लिए दर-दर भटक रहा है रिटायर्ड पुलिसकर्मी

जौनपुर। एक समय ऐसा था जब अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई में सबसे आगे रहने वाला सिपाही आज अपने ही घर में हुई चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने और न्याय की उम्मीद में थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक चक्कर लगाने को मजबूर है। विडंबना यह है कि जिसने वर्षों तक कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जोखिम उठाए, आज वही व्यवस्था से मदद की गुहार लगा रहा है।

नगर कोतवाली क्षेत्र के ख्वाजादोस्त (भोराजीपुर) निवासी रामलखन यादव पुलिस विभाग में सिपाही रहे हैं। पुलिस महकमे में उनकी पहचान एक जांबाज सिपाही के रूप में रही है। वह कुख्यात अपराधी प्रकाश पाक्या, बालू केवट समेत कई चर्चित अपराधियों के खिलाफ चली पुलिस मुठभेड़ों और विशेष अभियानों की टीम का हिस्सा रह चुके हैं। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए पहचाने जाने वाले रामलखन यादव ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन उन्हें अपने ही घर में हुई चोरी के मामले में कार्रवाई के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने पड़ेंगे।

पीड़ित द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार 10 जून की रात अज्ञात चोरों ने उनके बंद मकान का ताला तोड़कर लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और 20 हजार रुपये नकद चोरी कर लिए। घटना की सूचना 11 जून को कोतवाली पुलिस को लिखित रूप से दे दी गई, लेकिन आरोप है कि अब तक न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई।

चोरी गए सामान में सोने का झाला, टप्स, मंगलसूत्र, अंगूठियां, मांगटीका, नथिया, चांदी के सिक्के, पायल, चांदी का गिलास, करधन समेत अन्य कीमती सामान शामिल हैं।

राम लखन यादव का कहना है कि थाना कोतवाली में शिकायत के बावजूद सुनवाई न होने पर अब पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई गई है। मामले ने पुलिस महकमे के भीतर भी चर्चा का विषय बना दिया है। लोगों का कहना है कि यदि एक पूर्व पुलिसकर्मी को अपनी शिकायत पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

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