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राम मंदिर चढ़ावा कांड में बड़ा खुलासा
संगठित गिरोह’ की तरह होता था काम, कौशलपुरी के गोपनीय ठिकाने पर बंटती थी रकम
अयोध्या. राम मंदिर चढ़ावा कांड में ‘संगठित गिरोह’ की तरह काम को अंजाम दिया जा रहा था. तय भूमिकाओं से होता था गबन और बंटवारा. अब बैंक खाते और निवेश खंगाले जा रहे. दानपात्र से कौशलपुरी तक चढ़ावे का खेल !
बताते हैं कौशलपुरी में एक गोपनीय स्थान पर बंटवारा होता था.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा : एक साथ नहीं, धीरे-धीरे निकाली जाती थी रकम. परिवार-रिश्तेदारों के खातों तक पहुंची जांच.
अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि में कथित गबन के मामले में अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ गया है. SIT गठन के बाद स्थानीय स्तर पर भी जांच ने रफ्तार पकड़ ली है. जांच एजेंसियां अब संदिग्ध ट्रस्ट कर्मियों के बैंक खाते, वित्तीय लेनदेन, हालिया निवेश, संपत्ति और परिवार-रिश्तेदारों तक की भूमिका खंगाल रही हैं.
सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि दानपात्र की रकम में गड़बड़ी किसी एक कर्मचारी की करतूत नहीं, बल्कि संगठित गिरोह की तरह चलने वाला नेटवर्क हो सकता है. आशंका है कि इसमें हर व्यक्ति की भूमिका तय थी. कौन रकम निकालेगा, कौन छिपाएगा, कौन आगे पहुंचाएगा और कहां बंटवारा होगा.
जानकारी के अनुसार, चोरी की रकम एक साथ नहीं निकाली जाती थी। धीरे-धीरे रकम बाहर की जाती थी, ताकि किसी को शक न हो. दावा है कि रकम पहले गोपनीय स्थान पर छिपाई जाती थी और फिर कौशलपुरी इलाके में उसका बंटवारा होता था.
अब तक गबन की अनुमानित राशि का केवल कुछ हिस्सा ही रिकवर हो पाया है. इस बात ने जांचकर्ताओं को भी हैरान कर दिया है. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि संदिग्ध कर्मियों को किस ट्रस्ट पदाधिकारी का संरक्षण मिला हुआ था…