Alok Verma, Jaunpur Bueauro,
छात्रों के नजरिए से सरकार देखे नीट पेपर लीक मामले को, छात्रों के दर्द को महसूस करे सरकार
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर सामने आए पेपर लीक विवाद ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में ला खड़ा किया है। वर्षों की मेहनत, आर्थिक संघर्ष और सपनों के बीच जब परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तब सबसे बड़ा आघात उन छात्रों को होता है जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर अपने भविष्य को संवारने की कोशिश की।
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक हजारों परिवार अपने बच्चों की तैयारी के लिए बड़ी आर्थिक कीमत चुका रहे हैं। कोई जमीन बेच रहा है, कोई कर्ज लेकर कोचिंग करा रहा है, तो कोई अपनी जरूरतें कम कर बच्चों के सपनों को पूरा करने में लगा है। ऐसे में यदि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी की खबरें आती हैं तो students के भीतर यह भावना पैदा होती है कि उनकी मेहनत व्यवस्था की कमजोरियों के सामने कहीं पीछे छूट गई।
छात्रों का कहना है कि सरकार को इस मामले को केवल कानून-व्यवस्था या राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य और विश्वास के संकट के रूप में देखना चाहिए। परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता केवल प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि देश के युवाओं के मनोबल से जुड़ा प्रश्न है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को चुनौती दी है। इसका सबसे बड़ा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। कई छात्र महीनों तक सामाजिक जीवन से दूर रहकर कठिन तैयारी करते हैं। जब परीक्षा पर सवाल उठते हैं तो उनमें निराशा, हताशा और असुरक्षा की भावना बढ़ती है।
सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में छात्र यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि मेहनत और ईमानदारी के बावजूद व्यवस्था सुरक्षित नहीं रह पाती, तो युवाओं का भरोसा कैसे कायम रहेगा। छात्रों की मांग है कि दोषियों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई हो, जांच प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी एवं प्रशासनिक सुधार किए जाएं।
शिक्षाविदों का कहना है कि सरकार को छात्रों से संवाद बढ़ाना चाहिए। केवल प्रेस बयान या जांच की घोषणा काफी नहीं होगी। युवाओं को यह भरोसा दिलाना आवश्यक है कि उनकी मेहनत सुरक्षित है और देश की परीक्षा प्रणाली किसी भी प्रकार की धांधली से ऊपर रहेगी।
आज जरूरत केवल दोषियों की गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि उस भरोसे को बचाने की है जिस भरोसे पर देश का युवा अपना भविष्य बनाता है। क्योंकि जब छात्र निराश होते हैं, तब केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि देश की प्रतिभा और विश्वास दोनों प्रभावित होते हैं।