अगर आप दसवीं पास हों और टेंपो पर लोडर का काम करते हों, तो…

नितिन त्रिपाठी। लखनऊ।
अगर आप दसवीं पास हों और टेंपो पर लोडर का काम करते हों, तो ज़िंदगी से आप ज़्यादा से ज़्यादा क्या उम्मीद कर सकते हैं? शायद यही कि एक दिन खुद का टेंपो हो जाएगा। ज़्यादा हुआ तो अपना छोटा सा घर। या फिर यह सपना कि बच्चे पढ़-लिखकर इंजीनियर बन जाएँ। वो डायलाग भी है की गली मोहल्ले के लड़कों का प्यार अक्सर डॉक्टर इंजीनियर उड़ा ले जाते हैं ।
लेकिन भारत में कभी-कभी ऐसी कहानियाँ सामने आती हैं जो इस पूरी सोच को उलट देती हैं। ऐसी ही एक कहानी उन्नाव से निकलकर आई है। हाल ही में भारत सरकार ने तीन नई एयरलाइंस को परिचालन की मंज़ूरी दी है, और उनमें से एक है Shankh Air। इस एयरलाइन के एमडी हैं श्रवण विश्वकर्मा उम्र अभी चालीस के आसपास, और उपलब्धि ऐसी कि लोग ठहरकर देखने पर मजबूर हो जाएँ।
श्रवण की पढ़ाई ज़्यादा नहीं है—सिर्फ़ दसवीं तक। इसके बाद उन्होंने वही किया जो हालात ने सिखाया। कभी टेंपो पर लोडर, कभी खुद टेंपो चलाया। वैसे उन्नाव में टेंपो चलाने का अपना अलग swag है बाहरी न समझ पाएंगे – Raju Srivastava भी कभी यही काम किया करते थे। लेकिन श्रवण की कहानी यहीं नहीं रुकी। टेंपो से आगे बढ़कर उन्होंने अलग-अलग छोटे-मोटे काम किए—टेंट हाउस, इधर-उधर के व्यवसाय। शुरुआती कोशिशें ज़्यादा सफल नहीं रहीं, लेकिन रुकने का सवाल ही नहीं था। 2014 के आसपास सीमेंट ट्रेडिंग से पहली बड़ी स्थिरता आई। उसी समझ को आगे बढ़ाते हुए वे ट्रांसपोर्ट के बिज़नेस में उतरे। आज उनके पास लगभग 400 ट्रकों का बेड़ा है—और यही उनकी कमाई की असली रीढ़ है।
एविएशन में भी उन्होंने कोई दिखावटी या आधा-अधूरा कदम नहीं रखा। शुरुआत तीन ठीक-ठाक Airbus 320 विमानों से, बेस एयरपोर्ट Noida Jewar Airport पर तय है – जब तक वह पूरी तरह चालू नहीं होता, तब तक संचालन Indira Gandhi International Airport से होगा। उड़ानें लखनऊ, गोरखपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों को जोड़ेंगी।
मैं अक्सर कहता हूँ—छोटे शहरों के बच्चे या तो पूरी तरह गुमनाम रह जाते हैं, या अगर ठान लें तो आकाश की ऊंचाई तक पहुँचते हैं। श्रवण विश्वकर्मा के मामले में तो यह बात शब्दशः सच हो गई—उन्नाव की सड़कों से निकलकर वे सचमुच आसमान तक पहुँच गए।