सचिन तिवारी, संवाददाता अवध केसरी
निजी वाहनों पर “उत्तर प्रदेश सरकार/शासन” लिखवाने का चलन, नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियाँ
लखनऊ। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे निजी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं जिन पर “उत्तर प्रदेश सरकार” या “उत्तर प्रदेश शासन” लिखा हुआ है, जबकि यह स्पष्ट रूप से मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है। हैरानी की बात यह है कि सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
नियमों के अनुसार केवल अधिकृत सरकारी वाहनों पर ही शासन या सरकार का नाम लिखा जा सकता है, लेकिन कई प्रभावशाली लोगों, नेताओं के समर्थकों और तथाकथित रसूखदारों ने निजी गाड़ियों को सरकारी पहचान दे रखी है। इससे न सिर्फ आम जनता में भ्रम फैलता है, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का संदेश भी जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे वाहन चालक अक्सर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं और सरकारी वाहन होने का रौब दिखाकर कार्रवाई से बच निकलते हैं। वहीं, ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की कार्रवाई चुनिंदा और अस्थायी नजर आती है।
कानून जानकारों के मुताबिक निजी वाहन पर सरकारी नाम, प्रतीक या पहचान लिखवाना दंडनीय अपराध है। इसके तहत चालान, वाहन जब्ती और गंभीर मामलों में आईपीसी की धाराएँ तक लग सकती हैं। बावजूद इसके, ज़मीनी स्तर पर सख्ती न होने से ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
जनता ने मांग की है कि शासन इस पर राज्यव्यापी अभियान चलाकर ऐसे सभी निजी वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और दोषियों को उदाहरणात्मक सजा दे, ताकि कानून का डर बने और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक निजी वाहन सरकारी पहचान की आड़ में कानून से ऊपर बने रहेंगे?