यूपी-झारखंड से बांग्लादेश तक फैला कोडीन सिरप का खतरनाक नेटवर्क, मास्टरमाइंड की तलाश जारी

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

यूपी-झारखंड से बांग्लादेश तक फैला कोडीन सिरप का खतरनाक नेटवर्क मास्टरमाइंड की तलाश जारी

लखनऊ / वाराणसी / धनबाद।
उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी में शामिल एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कई महीनों से चल रही जांच के बाद इस रैकेट के एक प्रमुख सदस्य अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को राजधानी लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। उसके गिरफ़्तार होते ही खुलासों की ऐसी कड़ी खुली जिसने यह साफ कर दिया कि यह महज़ कुछ मेडिकल स्टोरों की हेराफेरी नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार का संगठित जाल था।

फर्जी फर्मों का जाल, असली कारोबार नशे का

जांच से पता चला कि गिरोह ने वैध दवा व्यापार का दिखावा करने के लिए झारखंड और उत्तर प्रदेश में कई फर्में बनाईं। इनमें से कुछ फर्में कागज़ों पर पंजीकृत तो थीं, लेकिन जमीन पर उनका कोई अस्तित्व नहीं था।
अमित टाटा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने धनबाद में “देवकृपा मेडिकल एजेंसी” और वाराणसी में “श्री मेडिकल” नाम की दो फर्में शुरू कराईं, जिनका उद्देश्य सिर्फ एक था—कोडीन सिरप की थोक खरीद, बिलिंग और बाद में उसकी अवैध सप्लाई को वैध दिखाना।

जांचकर्ताओं का कहना है कि नेटवर्क ने करीब 90 से अधिक फर्मों के नाम का इस्तेमाल किया। इनमें कई फर्मों का मालिक असल में दवा व्यवसाय से जुड़ा ही नहीं था — किसी के नाम पर ज्वेलरी का कारोबार मिला, किसी के नाम पर किराना दुकान, लेकिन दवा लाइसेंस और बिलिंग उन्ही के नाम से जारी होती रही।

सिरप सीधे पहुँचता था नशे के अड्डों तक

पिछले दो साल में इस गिरोह ने हजारों पेटियां कोडीन सिरप की उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल में सप्लाई कीं। कुछ खेपों को नेपाल और बांग्लादेश की सीमा तक पहुँचाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में एक छापे में करीब एक लाख बोतलें एक ही गोदाम से बरामद हुईं। पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क हाल के वर्षों में सबसे संगठित नशा-तस्करी मॉड्यूल में से एक था।

कौन है मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल?

जांच में सामने आया कि इस पूरी व्यवस्था का संचालन शुभम जायसवाल कर रहा था, जो पिछले कई महीनों से फरार है। अमित टाटा उससे सीधा संपर्क में था और सप्लाई चेन को संभालता था।
बताया जा रहा है कि शुभम इस व्यापार में “ऑर्डर मैनेजर” की भूमिका निभाता था — यानी किस राज्य में कितनी बोतलें भेजनी हैं, किस फर्म के नाम पर बिल बनना है, किस गोदाम में माल उतरना है, ये सब आदेश वही देता था।

कई जिलों तक बढ़ी जांच, 90 से ज़्यादा FIR

STF और ड्रग विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 90 से अधिक FIR दर्ज हो चुकी हैं। मेडिकल स्टोर, स्टॉकिस्ट, ट्रांसपोर्टर, और फर्जी लाइसेंस बनवाने वाले कई लोग भी पकड़े जा चुके हैं।
जांच टीम ने कई जिलों में गोदामों, दुकानों और फर्मों की लोकेशन पर छापेमारी की है। रिकॉर्ड, बिलिंग फाइलें, मोबाइल चैट और बैंक ट्रांज़ैक्शन की जांच की जा रही है।

क्या राजनीतिक संरक्षण था? अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं

छापेमारियों के दौरान एक आरोपी के पास “विधायक पास” लगी गाड़ी जरूर मिली, जिससे शक की कई परतें उठीं। हालांकि पुलिस सूत्रों के अनुसार अभी तक किसी पूर्व सांसद, विधायक या MLC का स्पष्ट नाम या प्रत्यक्ष भूमिका सामने नहीं आई है।
जांच एजेंसियों ने कहा है कि अगर किसी राजनीतिक हस्तक्षेप या संरक्षण का प्रमाण मिलता है, तो उस दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल

कोडीन सिरप वैध दवा है लेकिन सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल होती है।
इस घटना ने दवा-लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, फर्म सत्यापन, और फार्मा सप्लाई-चेन की निगरानी पर बड़े सवाल उठा दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इतनी भारी मात्रा में सिरप का अवैध बाजार में पहुँच जाना, सिस्टम की कई खामियों की तरफ इशारा करता है।

आगे का रास्ता

सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) को मामले की गहराई तक जाकर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
संभावना है कि जल्द ही रैकेट के बाकी फरार सदस्य गिरफ्तार हों और यदि कोई उच्च-स्तरीय संरक्षण मिलता है तो उस मोर्चे पर भी कार्रवाई तेज़ हो सकती है।

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