“अक्षय तृतीया” पर विशेष

भगवत्कृपा हि केवलम्

“सनातन परिवार” की प्रस्तुति”

आज का संदेश

“अक्षय तृतीया” पर विशेष
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सनातन धर्म इतना दिव्य एवं अलौकिक है कि इसका प्रत्येक दिन विशेष है। यहां प्रतिदिन कोई न कोई पर्व एवं त्योहार मनाया जाता रहता है, परन्तु कुछ विशेष तिथियां होती हैं जो स्वयं में महत्वपूर्ण होती है। इन्हीं महत्वपूर्ण तिथियों में एक है वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया। वैसे तो प्रत्येक माह की शुक्ल पक्षीय तृतीया विशेष होती है परन्तु बैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया अति विशिष्ट है जिसे “अक्षय तृतीया” के नाम से जाना जाता है।

अक्षय तृतीया के दिन ही इस सृष्टि का प्रादुर्भाव हुआ एवं सतयुग प्रारंभ हुआ था, त्रेता युग का प्रारंभ भी अक्षय तृतीया से ही हुआ था। यह तिथि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु ने नरनारायण, हयग्रीव एवं परशुराम का अवतार धारण किया था।

आज के ही दिन प्रसिद्ध तीर्थ बद्रीनारायण के कपाट खोले जाते हैं तथा वृंदावन में स्थित श्री बांके बिहारी जी के मंदिर में आज ही के दिन स्थापित विग्रह के चरण दर्शन होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष बांके बिहारी के चरण वस्त्रों से ढंके रहते हैं। जहां सतयुग एवं त्रेतायुग का प्रारंभ अक्षय तृतीया को हुआ था वही द्वापर युग का समापन अक्षय तृतीया को ही हुआ।

पुराणों में इस तिथि का विशेष महत्त्व है। अक्षय का अर्थ होता है जो कभी छय ना हो अर्थात जिसका कभी विनाश ना हो। आज के दिन किए गए कर्म, दान पुण्य अक्षय हो जाते हैं हमारे शास्त्रों में लिखा है कि :-

“अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं।
तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया!
उद्दिष्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यै!
तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव!!

अर्थात आज के दिन क्या हुआ दान – पुण्य एवं सत्कर्म जन्म जन्मांतर के लिए अक्षय हो जाता है इसलिए आज के दिन समस्त मानव समाज को सत्कर्म करते हुए अपने कर्मों को अक्षय बनाने का प्रयास करना चाहिए।

आज समस्त भारत देश में अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई जा रही है। इस विशेष तिथि के विषय में हमारे पुराणों में बृहद वर्णन प्राप्त होता है। आज के दिन भगवान विष्णु का पूजन विशेष महत्व रखता है। आज के दिन जो वस्तुएं दान की जाती है वे समस्त वस्तुएं अगले जन्म में मनुष्य को प्राप्त होती हैं ऐसी हमारी मान्यता है।

मैं “पनपा” यह बताना चाहूंगा कि जैसी मान्यता है कि भगवान विष्णु को अक्षत नहीं अर्पित करना चाहिए परन्तु आज का दिन ऐसा विशेष है कि आज के दिन भगवान विष्णु को अक्षत समर्पित करने से उन्हें विशेष प्रसन्नता होती है और ऐसा करने वाले की संतति एवं ऐश्वर्य अक्षय हो जाता है। मत्स्य पुराण में वेदव्यास जी भगवान ने लिखा है :-
अक्ष्या संततिस्तस्य
तस्यां सुकृतमक्षयम्!
अक्थतै: पूज्यते
विष्णुस्तेन् साक्षया स्मृता!!
इसलिए आज के दिन भगवान विष्णु को अक्षत अर्पित करना अक्षय पुण्यदायक होता है। आज हम अपने सनातन धर्म की मान्यताओं को भूलते चले जा रहे हैं। इसलिए यह तिथियां अपना महत्व खो रही हैं। सनातन संस्कृति को यदि आज नहीं माना जा रहा है तो उसका कारण हम स्वयं हैं। हमने अपनी विशेष तिथियों की विषय में जानने का प्रयास ही नहीं किया। प्रत्येक सनातन धर्मी को अपने विशेष पर्व एवं तिथियों के विषय में ज्ञान अवश्य होना चाहिए अन्यथा आने वाली पीढ़ी इनके विषय में जान ही नहीं पाएंगी।

अक्षय तृतीय के दिन सुबह स्नान – ध्यान करके, भगवान विष्णु की पूजा करके अपने जन्म जन्मांतर को सुधारने के लिए दान – पुण्य अवश्य करना चाहिए क्योंकि वैसे भी कहा गया कि दान करने से धन कभी नहीं घटता परन्तु अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान अक्षय हो जाता है।

जय श्री हरि
सभी भगवत्प्रेमियों को
आज दिवस की
“मंगलमय कामना”—
भगवत्कृपा हि केवलम्
पनपा

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