सोशल फोरम: ​एआई में निवेश की ताकत

सोशल फोरम: ​एआई में निवेश की ताकत

नितिन त्रिपाठी

​वह जो एआई की आलोचना करते हैं, उनका एक फेवरिट तर्क होता है यह एक बुलबुला है फट जाएगा, एक दिन डॉट कॉम बूम की तरह। वह कुछेक बेसिक भूल जाते हैं। वर्तमान का एआई बूम है। इस वजह से कि अमेरिका की कैश रिच कंपनीज गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा ये सब अपनी जेब से ट्रिलियन्स ऑफ डॉलर लगा कर इंफ्रा बना रही हैं। यह पब्लिक का पैसा उठा कर बनाई गई कोई हवा हवाई स्कीम नहीं है, बल्कि वह कंपनीज जो प्रॉफिट बना रही हैं, उन्होंने पिछले पांच सालों में अपने प्रॉफिट का बड़ा हिस्सा एआई में लगाया, क्योंकि उन्हें इसमें भविष्य दिखा और इन कंपनीज को इससे फायदा भी खूब मिला, उन्होंने उस पैसे को दोबारा लगाया और कमाया। अगर तुलनात्मक नज़रिए से देखा जाए, तो वर्तमान में अमेरिका में nasdaq जो जहां का टेक इंडेक्स है, में कंपनियों का PE रेशियो लगभग 27 है। अर्थात् इन कंपनीज का औसत वैल्यूएशन उतना ही है जितना आज की तारीख के फायदे को 27 से गुणा कर दिया जाए। अर्थात् इन कंपनियों का भविष्य में फायदा न भी बढ़े तो भी 27 साल में पैसा निकल आएगा। उसमें भी जो असल टॉप कंपनी हैं, जैसे विश्व की सबसे बड़ी एआई कंपनी nvidia इसका तो pe ratio बस 19 ही है।
​अब अगर भारतीय परिप्रेक्ष्य में तुलना करें, तो वर्तमान भारत में एआई तो खैर शून्य है, पर ट्रेडिशनल सभी क्षेत्रों में अदानी की कंपनीज छाई हैं। शायद ही कोई कंपनी हो, जिसका PE ratio 50 से कम हो। अगर बात टेक कंपनी की जाए तो जोमैटो, नायका, लेंसकार्ट, paytm शायद ही कोई हो, जिसका यह रेशियो 150 से कम हो। अर्थात् वर्तमान तरीके से चलते हुए ये कंपनी डेढ़ सौ साल में आपका पैसा वापस कर पाएगी। अगर आपको लगता है AI companies overvalued हैं, तो भारत में नमक, तेल, कपड़ा बेचने वाली कंपनी उससे दोगुनी ज्यादा और भारत में टेक बेचने वाली कंपनी उससे पांच गुना ज्यादा वैल्यूड है। इस बार का AI boom नगद पैसे से आया है। अमेरिकन टेक्नोलॉजी कंपनीज, मिडल ईस्ट के शेख, जापान के बैंक और यूरोप के खानदानी रईसों ने अपनी जेब से नगद लगा कर एआई की इंफ्रा और टेक्नोलॉजी बनाई। पब्लिक से अब तक पैसा उठाया ही नहीं गया। हां आने वाले वर्षों में ऐसा होगा और वह एआई के अगले दौर को फंड करेगा।
​मानवीय सभ्यता में कुछेक क्रांतियां आई जैसे stone age, फिर मेटल एज, इंडस्ट्रियल रेवोलुशन, फिर सूचना संचार क्रांति का दौर। यह कृत्रिम बुद्धि की खोज का दौर मानवीय सभ्यता का इतिहास लिखने वाला दौर है।
— नितिन त्रिपाठी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *