राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के भारतीय राजनीति के इस मौजूदा दौर में दोनों के बीच की ट्यूनिंग और तालमेल चर्चा का विषय 

Alok Verma, Jaunpur Bueauro,

राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के भारतीय राजनीति के इस मौजूदा दौर में दोनों के बीच की ट्यूनिंग और तालमेल चर्चा का विषय 

राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के राजनीतिक रास्ते भले ही एक-दूसरे के विपरीत हों, लेकिन भारतीय राजनीति के इस मौजूदा दौर में दोनों के बीच की ट्यूनिंग और तालमेल चर्चा का विषय बनी हुई है। कहा जाता है कि संसद के तीखे बहसों और राजनीतिक तल्खी के बीच रिजिजू भाजपा के इकलौते ऐसे केंद्रीय मंत्री हैं, जिनसे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक अलग और सहज रिश्ता देखने को मिलता है।
हाल ही में जब संसद में गतिरोध और हंगामे की स्थिति बनी, तब सरकार की ओर से इस मामले को सुलझाने की कमान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ही संभाली। उन्होंने राहुल गांधी से सीधे संवाद कायम किया—एक ही हफ्ते में दो बार मुलाकात की और फोन पर बात करके संसदीय कामकाज सुचारू रूप से चलाने में सहयोग मांगा।
इन दोनों नेताओं के बीच इस व्यक्तिगत तालमेल और सहजता के पीछे कई दिलचस्प और अनूठे कारण हैं:
एक साथ संसदीय यात्रा की शुरुआत: दोनों ने 14वीं लोकसभा से यानी वर्ष 2004 में पहली बार सांसद के रूप में अपना सफर शुरू किया था। एक मजेदार संयोग यह भी रहा कि दोनों जिस सीट से चुनाव जीतकर आए थे, उनका पहला अक्षर हिंदी के ‘अ’ से शुरू होता है (अमेठी और अरुणाचल पश्चिम)।
दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई: दोनों की उच्च शिक्षा की जड़ें दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़ी हैं।
फिटनेस और खेल का जुनून: राजनीति की भागदौड़ के बीच दोनों अपनी सेहत और फिटनेस को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं। जिम में पसीना बहाना, खेल-कूद और एक्टिव लाइफस्टाइल दोनों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है।
लगभग एक ही उम्र: दोनों के उम्र में ज्यादा अंतर नहीं है; रिजिजू, राहुल गांधी से महज एक साल छोटे हैं।
इसी फिटनेस प्रेम से जुड़ा एक रोचक वाकिया 6 दिसंबर को संसद परिसर में देखने को मिला था, जब डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के दौरान दोनों की मुलाकात हुई। राहुल गांधी ने रिजिजू से बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया और उन्हें अपने घर आकर साथ में एक्सरसाइज करने और जूडो खेलने का न्योता तक दे डाला।
हालांकि, रिजिजू इस ‘फिटनेस इनविटेशन’ को राजनीतिक वजहों से स्वीकार नहीं कर सके। भाजपा में राहुल गांधी के किसी भी कदम का राजनीतिक आकलन बेहद सावधानी से किया जाता है। ऐसे में रिजिजू के लिए राहुल के निजी आवास पर जाना एक राजनीतिक जोखिम हो सकता था, क्योंकि किसी भी अनौपचारिक मुलाकात के बाद राजनीतिक बयानों और दावों पर सफाई देना मुश्किल हो जाता।
वैसे, संसद परिसर में राहुल गांधी से दूरी बनाए रखने की यह सतर्कता सिर्फ रिजिजू तक सीमित नहीं है। सत्तापक्ष के कई नेता राहुल की मौजूदगी से बचते दिखते हैं। पिछले सत्र का एक वीडियो भी खूब छाया रहा था, जब एक केंद्रीय मंत्री मीडिया से बातचीत कर रहे थे और तभी अचानक राहुल गांधी वहां पहुंच गए—मंत्री जी तुरंत हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए वहां से निकल गए।
इन सब सियासी सावधानियों के बावजूद, संसद के भीतर संवाद के रास्ते खुले रखने में किरेन रिजिजू और राहुल गांधी का यह अनूठा तालमेल एक अहम पुल का काम कर रहा है।

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