CBSE के शीर्ष अधिकारियों का तबादला

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

CBSE के शीर्ष अधिकारियों का तबादला

OSM विवाद पर बढ़ा दबाव: CBSE के शीर्ष अधिकारियों का तबादला, जांच जारी

नई दिल्ली
CBSE की On-Screen Marking (OSM) प्रणाली को लेकर जारी विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में CBSE के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है तथा OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक समिति गठित की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह कार्रवाई OSM प्रणाली और उससे जुड़े टेंडर को लेकर उठे सवालों के बीच की गई है।

OSM प्रणाली को पहली बार बड़े पैमाने पर बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन में लागू किया गया था। परिणाम घोषित होने के बाद अनेक छात्रों और अभिभावकों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, मूल्यांकन प्रक्रिया तथा पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। कुछ छात्रों ने धुंधली स्कैन कॉपी, कथित रूप से छूटे हुए उत्तरों और अंकों में विसंगतियों की शिकायत की।

इस बीच कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत द्वारा OSM प्रणाली और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के अध्ययन के बाद उठाए गए सवालों ने भी ध्यान आकर्षित किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्हें संसदीय समिति के समक्ष अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया था। हालांकि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

विवाद के बढ़ने के बाद मामला न्यायपालिका तक भी पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने OSM प्रणाली में कथित अनियमितताओं और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों को लेकर केंद्र सरकार और CBSE से जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख भी निर्धारित की है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने स्वीकार किया है कि OSM प्रणाली में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं और छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जाएगा। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन भी दिया है।

विपक्षी दलों और कुछ छात्र संगठनों ने पूरे मामले में शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की मांग की है। कुछ नेताओं ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। वहीं सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और दोष पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक तकनीकी प्रणाली का नहीं, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास का प्रश्न बन चुका है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि समस्या तकनीकी थी, प्रशासनिक थी या खरीद प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई थी। फिलहाल लाखों छात्र और अभिभावक जांच के निष्कर्षों का इंतजार कर रहे हैं।

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