ब्यूरो,
चाय की दुकानों पर एग्जिट पोल का राज
आलोक वर्मा
बंगाल में कल आने वाले चुनाव परिणाम से पहले हर गली मोहल्ले में एक ही चर्चा है “सरकार किसकी बनेगी”
चाय की टपरी अब मिनी पार्लियामेंट बन चुकी है जहां हर कप के साथ नया राजनीतिक विश्लेषण परोसा जा रहा है
समोसा बेचने वाला भी अब सीटों का गणित समझाने लगा है और पान वाला स्विंग सीट का विशेषज्ञ बन गया है
एक बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा
पहले हम चुनाव देखते थे अब चुनाव हमें देख रहे हैं
“सोशल मीडिया पर पहले ही बन चुकी सरकारें”
रिजल्ट आने से पहले ही सोशल मीडिया पर अलग अलग नतीजे घोषित हो चुके हैं
कहीं जश्न है कहीं नाराजगी है और कहीं नैतिक जीत का ट्रेंड चल रहा है
मीम्स की बारिश में असली तस्वीर धुंधली हो गई है लेकिन कंटेंट क्रिएटर्स खुश हैं
एक पोस्ट में लिखा गया
चुनाव का रिजल्ट कल आएगा लेकिन बहस आज ही फाइनल है
लोग अपने अपने आंकड़ों के हिसाब से सरकार बना और गिरा रहे हैं
“कल सुबह का इंतजार और सियासी धड़कनें”
कल सुबह टीवी चैनलों पर सियासी रोमांच अपने चरम पर होगा
एंकर पहले से ही ब्रेकिंग के अंदाज में तैयार बैठे हैं
पार्टियों के दफ्तरों में या तो मिठाई ठंडी हो रही है या रणनीति दोबारा लिखी जा रही है
वहीं आम जनता बस इतना चाहती है कि नतीजे के बाद रोजमर्रा की जिंदगी थोड़ी आसान हो
एक युवा मतदाता ने कहा
सरकार कोई भी बने लेकिन महंगाई तो हर बार जीत जाती है