आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के ओएसडी राजीव दत्ता पर लगे मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए जांच के निर्देश
ओम बिड़ला के मानव तस्करी के आरोपी ओएसडी ने साइबर क्राइम से झूठ बोलकर भड़ास को सस्पेंड कराया, भड़ास तो लौट आया पर आप लोग मोदीराज चौकन्ना रहे
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) राजीव दत्ता पर लगे मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की राजस्थान हाईकोर्ट ने गहन जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इस संवेदनशील मामले की विस्तृत कानूनी जांच कर आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले में कई एफआईआर और शिकायती पत्र दर्ज हैं, जिनमें अजमेर, पाली, कोटा और बूंदी जैसे जिलों में मानव तस्करी, शोषण और अनुसूचित जाति-जनजाति उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं।
उपरोक्त खबर हटाने के लिए भड़ास पर बहुत प्रेशर आया। नहीं हटाया। अब इन लोगों ने बैकडोर से साइबर पुलिस से होस्टिंग कंपनी को नोटिस भिजवाकर भड़ास वेबसाइट ही सस्पेंड करा दिया है। भड़ास लीगल और टेक्निकल टीम काम कर रही है। साईट भी लौटेगी और बदला भी लिया जाएगा। बस इंतजार करो!
कंटेंट हटाने के लिए सिर्फ़ दो घंटे का वक्त दिया। मतलब दिन भर मेल चेक करते रहो, जाने कब मेल आ जाए कोई कंटेंट हटाने को! न देख पाये मेल तो वेबसाइट सस्पेंड। इसका कोई तोड़ निकालना पड़ेगा। रूस या ईरान या चाइना या ऐसे ही किसी देश में या डार्कवेब में एक डोमेन लेना पड़ेगा जहाँ भारतीय पुलिस के अवैध हाथ न पहुँच पायें। आप लोगों के पास कोई सुझाव हो तो ज़रूर बतायें, मुझे डायरेक्ट मैसेज करके। रूस चाइना आदि देशों की वेब होस्टिंग प्रोवाइडर कंपनीज से कैसे संपर्क किया जा सकता है, कोई जुगाड़ हो तो बताइयेगा।
अभी अभी भड़ास को एक्टिवेट किए जाने से संबंधित मेल प्राप्त हुआ। लेकिन इसके पहले हम लोगों ने “ओम बिड़ला ओएसडी मानव तस्करी आरोपी” वाली न्यूज़ को डिलीट कर इसकी सूचना डोमेन रजिस्ट्रार को भेजी थी, तब जाकर साईट का सस्पेंशन निरस्त हुआ
भड़ास वापस लौट आया है लेकिन ओम बिड़ला के ओएसडी के मानव तस्करी के आरोपी होने की खबर हटाने की सूचना डोमेन रजिस्ट्रार को भेजने के कई घंटों बाद।
मानवतस्करी डॉट कॉम नाम से अब एक साईट बनेगी जहां इसकी खबर टंगेगी। ये टोच्चा है क्योंकि इसने झूठ बोलकर नोटिस भिजवाया कि भड़ास ने उसका मानमर्दन करने वाला कोई वीडियो अपलोड किया है। भड़ास पर इसका कोई वीडियो है ही नहीं। सिर्फ़ कोर्ट ऑर्डर की ख़बर थी जिसमें ओम बिड़ला के ओएसडी पर मानव तस्करी के आरोपों की शिकायतों की जाँच के आदेश दिए गए हैं। एक इंट्रो के साथ कोर्ट के पाँच पेज ऑर्डर की कॉपी अपलोड की गई थी।
ये न्यूज़ किसी लेवल पर हटवाए जाने योग्य नहीं थी लेकिन ओएसडी ने साइबर क्राइम जयपुर को सेट कर झूठा नोटिस डोमेन रजिस्ट्रार को भिजवाया। हद तो ये कि मुझ तक कोई नोटिस आज तक नहीं आया।
मोदी राज में दो घंटे में कंटेंट हटाने का कानून लागू हो चुका है। इसका पहला शिकार भड़ास हुआ है। कैसे इस क़ानून का दुरुपयोग किया गया, भड़ास प्रकरण इसका मिसाल है। आप लोग भी जो डिजिटल मीडिया वाले हैं, हर घंटे एक बार मेल चेक कर लिया करिए, क्या पता अगले दो घंटे में कोई खबर कोई वीडियो कोई पोस्ट हटाने का मेल आ गया हो। न हटायेंगे तो आपकी डिजिटल पहचान मिटा दी जाएगी। तो इस तरह मोदी जी ने डिजिटल मीडिया वालों को हर घंटे मेल चेक करने के काम पर लगा दिया है।