कायस्थ मित्र मंडल का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं : धीरज श्रीवास्तव

Alok Verma, Jaunpur Bueauro,

कायस्थ मित्र मंडल का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं : धीरज श्रीवास्तव

जौनपुर। नववर्ष के उपलक्ष्य में कायस्थ मित्र मंडल के तत्वावधान में नगर के एक होटल में भव्य गेट-टुगेदर पार्टी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कायस्थ समाज के युवा नेता धीरज श्रीवास्तव व उनके सहयोगियों द्वारा किया गया, जिसमें जनपद भर से बड़ी संख्या में चित्रांश बंधुओं की सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री चित्रगुप्त जी की मूर्ति के समक्ष विधिविधान से आरती-पूजन के साथ हुआ। इसके उपरांत उपस्थित लोगों ने आपसी परिचय प्राप्त किया तथा समाज के सदस्यों द्वारा सांस्कृतिक व विचारात्मक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिससे आयोजन का माहौल आत्मीय और सौहार्दपूर्ण बना रहा।

इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक धीरज श्रीवास्तव ने कहा कि कायस्थ मित्र मंडल का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, न कि तोड़ना। उन्होंने कहा कि मंडल चाहता है कि समाज के सभी लोग एकजुट होकर एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनें। जिस प्रकार अन्य समाज आपसी सहयोग और एकजुटता के साथ आगे बढ़ते हैं, उसी तरह कायस्थ समाज को भी संगठित होकर आगे आना होगा।

उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को एक-दूसरे की बुराइयों को छोड़कर अच्छाइयों को अपनाना चाहिए, ताकि समाज के भीतर सकारात्मक वातावरण बने और अन्य समाजों के बीच भी एक अच्छा संदेश जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज एकजुट है और जो लोग इसे कमजोर समझते हैं, उन्हें यह एहसास होना चाहिए कि चित्रांश समाज अपनी एकता और मजबूती के लिए सदैव तत्पर है।

धीरज श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि इस प्रकार के आयोजन आगे भी लगातार किए जाएंगे, जिनमें जनपद के सभी चित्रांश बंधुओं को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि आपसी संपर्क, सहयोग और संगठन को और अधिक मजबूत किया जा सके।

कार्यक्रम में कायस्थ समाज के वरिष्ठ एवं बुद्धिजीवी जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से डॉ. इंद्रसेन श्रीवास्तव, नीलमणि श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, डॉ. रवि प्रकाश श्रीवास्तव, शिवमोहन श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव,सरोज श्रीवास्तव सहित आयोजक मंडल के मनीष श्रीवास्तव (रिंकू), मनीष श्रीवास्तव (बच्चा), संदीप श्रीवास्तव, नवनीत श्रीवास्तव, मयंक नारायण, संतोष श्रीवास्तव (बेचू), अनिल श्रीवास्तव (बबलू), सिपाही अमित श्रीवास्तव, बड़े बाबू प्रमोद श्रीवास्तव, दादा पंकज श्रीवास्तव समेत अनेक चित्रांश बंधु मौजूद रहे।

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