अवैध कट बने मौत का कारण, अब नहीं होगी लापरवाही,सड़क हादसों पर जिलाधिकारी सख्त, 100% बंद होंगे अवैध कट

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

अवैध कट बने मौत का कारण, अब नहीं होगी लापरवाही,सड़क हादसों पर जिलाधिकारी सख्त, 100% बंद होंगे अवैध कट

जौनपुर।
जनपद में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद में स्थित सभी अवैध कट शत-प्रतिशत बंद किए जाएं। जिन क्षेत्रों में अवैध कट की शिकायतें अधिक मिल रही हैं, वहां पुलिस विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी संयुक्त रूप से ग्रामीणों को समझाएं कि अवैध कट दुर्घटनाओं का बड़ा कारण हैं।

जिलाधिकारी ने एनएच अधिकारियों को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप होल्डिंग एरिया बनाए जाने के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करें। साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट) की पहचान कर तत्काल सुधारात्मक कार्य कराने के निर्देश दिए। पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई ब्लैक स्पॉट सूची पर एनएच और लोक निर्माण विभाग को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

लोक निर्माण विभाग को सड़कों के गड्ढों की मरम्मत, संकेतक बोर्ड लगाने, स्पीड ब्रेकर निर्माण, रोड मार्किंग तथा सड़क किनारे सफेद पट्टी पेंट कराने का कार्य प्राथमिकता पर पूरा करने को कहा गया। इसके अलावा सड़कों के किनारे उगी झाड़ियों की सफाई कराने के भी निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को सख्त निर्देश दिए कि स्कूली वाहनों की फिटनेस और मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। किसी भी स्थिति में अनफिट वाहन सड़क पर न चलें और टेंपो व अन्य वाहनों में तय क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर कठोर कार्रवाई की जाए।

बैठक में बिना हेलमेट,ओवरस्पीडिंग,ओवरलोडिंग और नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के खिलाफ सघन अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसके लिए जनजागरूकता को और मजबूत किया जाना आवश्यक है।

विद्यालयों और महाविद्यालयों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने तथा विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए। वहीं, दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए एंबुलेंस सेवा, ट्रॉमा सेंटर और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई।

पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस द्वारा दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों की पहचान कर प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। सड़कों पर अवैध वाहन खड़े न हों, इसके लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वय से सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी आई है। साथ ही एनएच और पीडब्ल्यूडी विभाग को हर स्तर पर पुलिस का त्वरित सहयोग दिया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं में जिम्मेदार विभाग की जवाबदेही तय की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी समन्वयक विभागों के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जाने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खाड़िया, अपर जिलाधिकारी (भू-राजस्व) अजय अम्बष्ट, अपर पुलिस अधीक्षक आयुष श्रीवास्तव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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