उदयपुर — उत्तर भारत का सबसे सुंदर शहर, बिना किसी विवाद के

उदयपुर — उत्तर भारत का सबसे सुंदर शहर, बिना किसी

विवाद के

नितिन त्रिपाठी

उदयपुर सिर्फ़ भारत का नहीं, दुनिया के एलीट ट्रैवलर्स का पसंदीदा शहर है। विदेशी मेहमान, बड़े उद्योगपति, सेलिब्रिटी वेडिंग्स—सबका ठिकाना। दुनिया के टॉप 10 होटलों में से 3 होटल उदयपुर में हैं। जिसने उदयपुर नहीं देखा, वह सुंदरता की परिभाषा ही नहीं समझ सकता।

भारत के ज़्यादातर टियर-3 शहर एक जैसे होते हैं—गंदगी, धूल, प्रदूषण, भीड़, गर्मी, न कोई दृश्य, न कोई सुकून। लेकिन उदयपुर एक अलग ही दुनिया है। इसकी असली सुंदरता का कारण है—झीलें और अरावली की पहाड़ियाँ। चारों तरफ़ छोटी-छोटी पहाड़ियाँ, बीच-बीच में झीलें, हर जगह हरियाली। एक जगह से दूसरी जगह जाओ—शहर छोटा है, दूरी मुश्किल से 5 किमी, लेकिन रास्ते में 4-5 पहाड़ियाँ मिल जाती हैं। यही पहाड़ियाँ भीड़ को रोकती हैं, यही हरियाली देती हैं, यही मौसम को सुहावना बनाती हैं। इसलिए उदयपुर आज भी सांस लेने लायक शहर है।

अब समस्या शुरू होती है। हाल ही में कोर्ट का एक फैसला आया है—100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को जंगल/हिल एरिया नहीं माना जाएगा। मतलब, राज्य सरकार की अनुमति से वहाँ माइनिंग और निर्माण हो सकता है। अब ज़रा हकीकत समझिए—राज्य सरकार, माइन माफिया और रियल एस्टेट का गठजोड़ हम सब जानते हैं। इस नियम के लागू होते ही उदयपुर की ज़्यादातर पहाड़ियाँ खतरे में हैं। पहाड़ियाँ गईं तो पहले अवैध माइनिंग आएगी, फिर धूल-प्रदूषण पूरे शहर में फैलेगा। पहाड़ी ज़मीन को रेजिडेंशियल बना दिया जाएगा, सीवेज झीलों में जाएगा, झीलें मरेंगी, जंगल खत्म होंगे, पूरा इकोसिस्टम टूटेगा। और फिर उदयपुर भी एक और साधारण, प्रदूषित शहर बन जाएगा—सहारनपुर टाइप।

यह सिर्फ़ उदयपुर की कहानी नहीं है। पूरा हरियाणा, राजस्थान और NCR इसी खतरे में है। और यह सब किस लिए? इसे विकास नहीं कहते, इसे सरकारी संरक्षण में भ्रष्टाचार कहते हैं। विकसित देश देखिए—अमेरिका अपने जंगल नहीं काटता, स्विट्ज़रलैंड Alps को पूरी इज़्ज़त से बचाता है। और हम? जिनके पास प्रकृति ने सब कुछ दिया, हम वही नष्ट करने में लगे हैं।

अरावली को बचाना कोई पर्यावरणीय नारा नहीं है।
यह NCR, हरियाणा और राजस्थान के भविष्य का सवाल है।

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