आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
उत्तर प्रदेश 2025: बिजली बिल राहत योजना को लेकर हंगामा, उपभोक्ताओं ने कहा— यह राहत नहीं, सीधा छलावा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नई बिजली बिल राहत योजना 2025 अपने लागू होने के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई है। योजना की घोषणा के दौरान सरकार ने इसे करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत देने वाला “ऐतिहासिक कदम” बताया था, लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। हजारों उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि यह योजना बिजली विभाग का सबसे बड़ा छलावा साबित हो रही है, क्योंकि जिन लोगों ने पिछले वित्तीय वर्ष में नियमित रूप से बिल जमा किया था, उन्हें योजना के किसी भी श्रेणी में लाभ नहीं दिया जा रहा।
सबसे बड़ी नाराज़गी इस बात को लेकर है कि नियमित भुगतान करने वाले उपभोक्ता, जिन्हें ईमानदार और समय पर बिल जमा करने वाला मानकर प्रोत्साहन मिलना चाहिए था, उन्हें ही योजना से बाहर कर दिया गया। कई उपभोक्ता यह भी कह रहे हैं कि अगर पुराना बकाया होने पर ही राहत मिलती है, तो लोगों को समय पर बिल जमा करने का क्या फायदा रह गया है? बिजली दफ्तरों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि “जो लोग समय पर बिल भरते रहे, उन्हें ही क्यों सज़ा दी जा रही है?”
कई जिलों में उपभोक्ता परिषदों, स्थानीय संगठनों और नागरिक मंचों ने बैठकें कर सरकार और ऊर्जा विभाग से इस नीति की समीक्षा की माँग की है। उनका कहना है कि बिजली विभाग ने पात्रता की जो शर्तें बाद में सामने रखीं, वे घोषणा के समय खुलकर नहीं बताई गईं, जिससे करोड़ों उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और नाराज़गी पैदा हुई।
बिजली विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि योजना के बहाने सिर्फ प्रचार किया गया, लेकिन वास्तविक राहत देने की तैयारी नहीं थी। कई जिलों में शिकायतें हैं कि बिल से राहत हटाकर “अनियमित बिलिंग” और “पुराना बकाया जोड़कर नया बिल बढ़ाने” जैसे मामले बढ़ गए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि यह राहत योजना से ज़्यादा राजनीतिक घोषणा लग रही है, जिसमें वास्तविक क्रियान्वयन कमजोर है।
ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा पर भी उपभोक्ताओं का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। लोग आरोप लगा रहे हैं कि मंत्री ने योजना को लेकर जो भरोसेमंद बातें सार्वजनिक मंचों से कही थीं, वे धरातल पर नहीं दिख रहीं। कई उपभोक्ताओं ने कहा कि “राहत योजना की आड़ में जनता को उम्मीद दी गई, लेकिन बदले में मिला सिर्फ निराशा और उलझी हुई बिलिंग।”
उधर बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना के पात्रता नियम पहले से तय थे और विभाग ने उसी के अनुसार कार्य किया है। लेकिन उपभोक्ता परिषदों का सवाल है कि अगर नियम पहले से स्पष्ट थे, तो फिर घोषणा में इन्हें प्रमुखता से क्यों नहीं बताया गया? लोग इसे “छिपाई गई शर्तें” बताकर विभाग की नीयत पर शक जता रहे हैं।
राज्य में कई जगह बिजली कार्यालयों पर भीड़ बढ़ने लगी है। उपभोक्ता राहत की उम्मीद से दफ्तर पहुँचते हैं, लेकिन उन्हें बताया जा रहा है कि उनका पुराना भुगतान इस योजना के दायरे में नहीं आता। शिकायतें इतनी बढ़ गई हैं कि कई जिलों के स्थानीय प्रशासन को विशेष कैंप लगाने पड़े हैं।
हालाँकि सरकार की तरफ से दावा किया जा रहा है कि योजना का उद्देश्य जरूरतमंद उपभोक्ताओं को राहत देना है, लेकिन ज़मीन पर उपभोक्ताओं की नाराज़गी यह साफ कर रही है कि योजना को लेकर जनता और सरकार के दावों के बीच भारी अंतर है।
कुल मिलाकर, बिजली बिल राहत योजना 2025 को लेकर राज्य में गंभीर असंतोष पैदा हो गया है। उपभोक्ता इसे “राहत की घोषणा नहीं, बल्कि बढ़ती परेशानी का नया रूप” बता रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार इस नाराज़गी का समाधान करती है या विवाद और बढ़ता है यह देखना महत्वपूर्ण होगा।