आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

अखिलेश का ह्यूमर है शानदार, राहुल के साथ रंग ला सकती है जुगलबंदी
अखिलेश यादव मेरे फेवरेट राजनेताओं में से एक है उनका ह्यूमर मुझे लाजवाब लगता है कितना भी बड़ा पत्रकार हो अखिलेश यादव सबको मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं। बीजेपी के नेताओं से भी बहुत शानदार तरीके से बात करते हैं राहुल गांधी के साथ उनकी जोरदार केमिस्ट्री ने बीजेपी और दुनिया को पिछले लोकसभा चुनाव में हिला दिया था लेकिन शायद बीजेपी ने अभी उसकी भरपाई कर ली है।
मुझे लगता है कि अगले साल बीजेपी को अखिलेश यादव एक बार फिर से जोर का झटका दे सकते हैं और बंगाल में ममता बनर्जी उनके साथ बीजेपी को एक बार फिर से हिला सकती है।
लेकिन अखिलेश यादव की पार्टी के लोगों से बात करने पर पार्टी के लोगों को अखिलेश यादव नेताजी मुलायम सिंह यादव की तुलना में बहुत पीछे लगते हैं। कार्यकर्ताओं को नेताजी बहुत याद आते हैं और हर कोई नेता जी की तारीफ करते हुए नहीं थकता है लखनऊ के पत्रकारों को आज भी मुलायम सिंह यादव के कसीदे पढ़ता हुआ देखता हूं तो सोचता हूं कि कमाल का व्यक्तित्व था कितने लोग हैं जिनको मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में आवास दिया उनकी जरूरत के समय उनके साथ खड़े रहे।
यश भारती पुरस्कार शुरू करने के पीछे मुलायम सिंह जी की मंशा यही थी कि लोककलाकारों और अन्य लोगों की मदद करना ही था। मुलायम सिंह यादव ऐसे नेता थे जो अपने कार्यकर्ताओं के घर का चूल्हा कैसे जलेगा ये पहले सोचते थे और उनकी कामयाबी का सबसे बड़ा राज यही था। शायद अखिलेश यादव जी को इस पर ध्यान देना चाहिए। आने वाले साल में उत्तर प्रदेश में चुनाव है और यह चुनाव समाजवादी पार्टी के लिए एसिड टेस्ट होगा। मुझे लगता है कि अखिलेश यादव जी इस बार पुनः इस चुनाव में कामयाबी हासिल करेंगे और इसके लिए उनको सभी छोटे बड़े दल और उनके कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना होगा। अखिलेश यादव जी को अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से लगातार मिलते रहना होगा और उनको सक्रिय रखना होगा तभी ये कामयाबी हासिल कर पाएंगे।