विधान परिषद मानसून सत्र: प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में प्रवेश की आयु एक समान किए जाने की नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव की सरकार से मांग

ब्यूरो,

विधान परिषद मानसून सत्र: प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में प्रवेश की आयु एक समान किए जाने की नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव की सरकार से मांग

उत्तर प्रदेश विधान मंडल का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। विधानपरिषद में नेता विरोधी दल लाल बिहार यादव ने प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में प्रवेश की आयु का मसला उठाते हुए कहा कि इसे एक समान किया जाए।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव ने प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में प्रवेश की आयु का मसला उठाया। कहा कि प्राइवेट स्कूल तीन साल में प्रवेश ले रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ सरकारी विद्यालय पांच साल में बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं। ऐसे में सरकारी स्कूल में पढ़ाने की चाहत रखने वाले अभिभावकों को दो साल का समय अधिक लगता है और वो निजी स्कूल की तरफ बढ़ जाते हैं। ऐसे में सरकार से उनकी मांग है कि निजी व सरकारी स्कूलों के समय को एक किया जाए।

विधान परिषद में स्कूलों के मर्जर को लेकर सवाल उठाते हुए लाल बिहारी यादव ने कहा कि शिक्षा समाज को आगे ले जाती है। जबकि भाजपा की सरकार संविधान के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को संविधान की समवर्ती सूची में इसलिए रखा गया क्योंकि इस पर सभी का समान अधिकार है। बच्चे 25 हों या 50, स्कूल बंद नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को व्यवसाय समझ कर बंद कर रही है। जबकि स्कूलों में यदि 5 भी बच्चे हैं तो उस पर सरकार को खर्च करना चाहिए।

उन्होंने परिषदीय विद्यालयों में लागू एनसीईआरटी की पुस्तकों को लेकर कहा कि अनुदानित और सहायता प्राप्त विद्यालयों को तो किताबें मिल जाती हैं लेकिन काफी संख्या में बच्चे किताबों से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि निजी दुकानों पर भी किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित कराए।

लाल बिहारी ने प्रदेश में बंद मदरसों को लेकर कहा कि मदरसों को मिलने वाले अनुदान को सरकार ने बंद कर दिया है। फिर भी मदरसे चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम अपनी आय का 10 फीसदी जकात के लिए रखता है। उन जकात के पैसे से मदरसों का संचालन किया जाता है। इसके बावजूद सरकार उनकी जांच करा रही है।

उन्होंने कहा कि कहीं कहीं पर मानक से अधिक प्रवेश लिया जा रहा है। एक सेक्शन की आड़ में विद्यालय मानक से अधिक प्रवेश ले रहे हैं। उन्होंने बलिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे बालिका के विद्यालय में गए तो वहां पर 4000 छात्राओं का प्रवेश हुआ था। इसलिए मानक से अधिक प्रवेश पर रोक लगाई जाए। इस दौरान उन्होंने कम्प्यूटर शिक्षा को भी अनिवार्य बनाये जाने की मांग रखी।

विधान परिषद में सदस्य आशुतोष सिन्हा ने स्कूलों को बंद किये जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हमारे लोग बच्चों को शिक्षित करने के लिए पीडीए पाठशाला चला रहे हैं तो हमारे कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

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