IIआज का पंचांग एवं ग्रहों की स्थितिII
आलोक वाजपेयी (ज्योतिषाचार्य),
कस्तूरी तिलकं ललाट पटले वक्ष: स्थले कौस्तुभं।
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणु: करे कंकणं॥
सर्वांगे हरि चन्दनं सुललितं कंठे च मुक्तावली।
गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपाल चूडामणि:॥
” हे श्रीकृष्ण! आपके मस्तक पर कस्तूरी तिलक सुशोभित है। आपके वक्ष पर देदीप्यमान कौस्तुभ मणि विराजित है, आपने नाक में सुंदर मोती पहना हुआ है, आपके हाथ में बांसुरी है और कलाई में आपने कंगन धारण किया हुआ है ” ” हे हरि! आपकी सम्पूर्ण देह पर गन्धित चंदन लगा हुआ है और सुंदर कंठ मुक्ताहार से विभूषित है, आप सेवारत गोपियों के मुक्ति प्रदाता हैं, हे गोपाल! आप सर्व सौंदर्य पूर्ण हैं, आपकी जय हो ” !!!
IIआज का पंचांग एवं ग्रहों की स्थितिII
श्री गणेशाय नमः, जय श्री कृष्ण
सब सुखी व स्वस्थ रहें
विक्रम संवत 2081
संवत्सर नाम -: कालयुक्त
संवत्सर राजा-: मंगल
संवत्सर मंत्री-: शनि
सूर्य उत्तरायण, ऋतु-: वसंत
सूर्य उदय : प्रातः 6/45
सूर्य अस्त : सायं 6/20
फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि
अंग्रेजी दिनांक-: 6/3/2025
दिन-: गुरुवार
चंद्रमा-: वृष राशि में
राशि स्वामी-: शुक्र
आज का नक्षत्र-: रोहिणी
नक्षत्र स्वामी – : चंद्र
️ चंद्रमा का नक्षत्र प्रवेश:
प्रात: 6/53 से रोहिणी नक्षत्र चरण 2 में
दोपहर 12/38 से रोहिणी नक्षत्र चरण 3 में
सायं 6/22 से रोहिणी नक्षत्र चरण 4 में
रात्रि 12/06 से मृगशिरा नक्षत्र चरण 1 में
योग -: रात्रि 8/28 तक विषकुम्भ योग (इस योग में किए गए काम का फल अशुभ होता है, इस योग में किसी भी तरह के शुभ काम करने की मनाही होती है.
इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति को ज़िंदगी भर संघर्ष करना पड़ता है.
इस योग से ग्रसित व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार रहते हैं और उसके काम बनते-बनते बिगड़ने लगते हैं.
इस योग में जन्मे व्यक्ति को शिव और हनुमान जी की पूजा करने से लाभ होता है)
रात्रि 8/29 के बाद प्रीति योग ( सूर्य और चंद्रमा की दूरी के आधार पर बनने वाले योग को प्रीति योग कहते हैं. यह एक शुभ योग है. प्रीति योग में किए गए कामों से मान-सम्मान मिलता है. इस योग में जन्म लेने वाले लोग भाग्यशाली होते हैं. विषयों के ज्ञाता, जीवंत और उत्साहपूर्वक कोई भी काम करते हैं.
ये लोग सौन्दर्य प्रेमी होते हैं और विपरीत लिंग के व्यक्ति से प्रेम करते हैं. प्रीति योग में किए गए विवाह से जीवन सुखमय होता है. इस योग में मेल-मिलाप बढ़ाने और रूठे मित्रों-संबंधियों को मनाने में सफलता मिलती है. झगड़े निपटाने या समझौता करने के लिए भी यह योग शुभ होता है.)
आज का विशेष पर्व एवं धार्मिक महत्त्व
भद्रा प्रात: 10/51 से रात्रि 10/05 तक
ज्योतिषीय सलाह:
शुभ दिशा-: पूर्व,उत्तर, उत्तर-पूर्व
दिशा शूल -: दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचें, अति आवश्यक होने पर दही खाकर प्रस्थान करें
आज की ग्रह स्थिति -:
सूर्य -: कुंभ राशि पूर्व भाद्रपद नक्षत्र चरण 1 में (नक्षत्र स्वामी गुरु)
मंगल -: मिथुन राशि पुनर्वसु नक्षत्र चरण 2 में (नक्षत्र स्वामी गुरु)
बुद्ध -: मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 2 में (नक्षत्र स्वामी गुरु) सायं 6/28 से चरण 3 में
गुरु -: वृष राशि रोहिणी नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी चंद्र)
शुक्र (वक्री) -: मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
शनि (अस्त) -: कुंभ राशि पूर्व भाद्रपद नक्षत्र चरण 3 में (नक्षत्र स्वामी गुरु)
राहु-: मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 1 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
केतु-: कन्या राशि उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र चरण 3 में (नक्षत्र स्वामी सूर्य)
राहु काल -: दोपहर 2/00 से 3/28 बजे तक कोई शुभ या नया कार्य न करें
दैनिक लग्न सारणी -:
प्रात: 7/09 तक कुम्भ
8/33 तक मीन
10/09 तक मेष
दोपहर 12/04 तक वृष
2/18 तक मिथुन
सायं 4/38 तक कर्क
6/56 तक सिंह
रात्रि 9/11 तक कन्या
11/31 तक तुला
1/49 तक वृश्चिक
सूर्योदय पूर्व 3/54 तक धनु
5/37 तक मकर
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जय जय श्री राधे