
इंसेफेलाइटिस से जूझ रहे पूर्वांचल वासियों के लिए राहत की खबर है। जन्म से दिव्यांग मासूमों को पहले दिन से इलाज मिल सकेगा। उनके इलाज व प्रशिक्षण के बाद उन्हें सामान्य बच्चों की तरह तैयार किया जाएगा। यह होगा सीआरसी में खुल रहे अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में। यह प्रदेश का पहला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर होगा।
समेकित क्षेत्रीय निदान केन्द्र दिव्यांगजन(सीआरसी) में पहला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर खुलेगा। दिव्यांग बच्चों को एक ही छत के नीचे इलाज की सुविधा मिलेगी। मानसिक या शरीरिक दिव्यांग मासूमों के लिए इस सेंटर में अलग-अलग इंतजाम होंगे। फौरी तौर पर इसका संचालन सीतापुर आई हॉस्पिटल में ही होगा। इसके लिए सीआरसी को जिला प्रशासन से आई हॉस्पिटल में दो हॉल मिल गए हैं।
सीआरसी के निदेशक रमेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि इस सेंटर में दिव्यांगों के पुनर्वास की सभी सुविधाएं एक छत के नीचे मिलेंगी। इसमें फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, आकुपेशनल थेरेपी, संवेदी उपक्रम और शब्द व अक्षरों के पहचान की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करने की उम्र तक पहुंचने के दौरान बच्चे को सामान्य बच्चों के बराबर क्षमतावान बनाना है।
उन्होंने बताया कि सीआरसी में दिव्यांगों को प्रशिक्षित शिक्षकों के साथ ही तकनीकी मदद भी दी जाएगी। इसमें बच्चों के साथ ही उनके अभिभावकों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रस्ताव को केन्द्रीय सामाजिक न्याय और सहकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन विभाग से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके वित्तीय मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
सीआरसी में गुरुवार को विश्व दिव्यांगजन दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर ऑनलाइन तथा ऑफलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें दिव्यांगजनों के लिए नींबू दौड़ की प्रतियोगिता भी होगी। सामान्य विद्यालयों के छात्रों के लिए दिव्यांगता विषय पर एक प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएन पान्डेय मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे।
मानसिक दिव्यांगता का दवाओं से इलाज हो सकता है। होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. रूप कुमार बनर्जी ने बताया कि दिव्यांगों में कई प्रकार की मानसिक व शारीरिक समस्याएं होती हैं। यह सामान्य बच्चों में कम पाई जाती हैं। कुछ बच्चों की मुंह से लगातार लार का टपकतें रहना या फिर हाथ, पैर या गर्दन को हिलाते रहना लक्षण है। कुछ बच्चे शर्मिले स्वभाव के तो कुछ उदण्ड प्रवृति के होते हैं। बच्चों में भूलने या याददाश्त कम होने की प्रवृत्ति होती हैं। ऐसे बच्चों की होम्योपैथिक चिकित्सा करने से भूलने और याददाश्त के कम होने की बीमारी में अप्रत्याशित लाभ होता है।