कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर…

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो …

ये जो शहतीर है पलकों पे उठा लो यारो ये जो शहतीर है पलकों पे उठा…

हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए…

हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए इस…