Alok Verma, Jaunpur Bueauro,
नगर में चहुंओर गंदगी का साम्राज्य, नगर पालिका प्रशासन बेपरवाह
जौनपुर। ऐतिहासिक शहर जौनपुर इन दिनों नगर पालिका प्रशासन की अनदेखी और घोर लापरवाही के चलते गंदगी के भारी संकट से जूझ रहा है। नगर का शायद ही कोई ऐसा कोना या मोहल्ला बचा हो, जहां कूड़े-कचरे के ढेर न लगे हों। मुख्य चौराहों से लेकर तंग गलियों और प्रमुख बाजारों तक में बिखरी पड़ी गंदगी ने नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। चारों ओर फैली इस दुर्दशा पर स्थानीय नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह मौन और संवेदनहीन बना हुआ है। जिम्मेदार अधिकारियों को जनता की मूलभूत समस्याओं से मानो कोई सरोकार ही नहीं रह गया है।
शहर के कई प्रमुख हिस्सों में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कचरा पात्रों से निकलकर कूड़ा सड़कों के बीचों-बीच फैल रहा है। नालियां कचरे, प्लास्टिक और मलबे से पूरी तरह बजबजा रही हैं। सफाई के अभाव में नालियों का गंदा, दुर्गंधयुक्त पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे न केवल राहगीरों का चलना दूभर हो गया है, बल्कि आसपास के दुकानदारों और निवासियों का बैठना भी मुश्किल हो चुका है। दुर्गंध और उड़ती धूल के बीच से गुजरना लोगों की मजबूरी बन चुका है। बजबजाती नालियों और सड़ते कचरे के कारण मच्छरों व मक्खियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है, जिससे क्षेत्र में मौसमी व गंभीर बीमारियां फैलने की पूरी आशंका बनी हुई है।
स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने इस नारकीय स्थिति को लेकर कई बार नगर पालिका कार्यालय के चक्कर लगाए हैं। नागरिकों का कहना है कि उन्होंने समस्याओं से अवगत कराते हुए अनगिनत बार मौखिक और लिखित शिकायतें दर्ज कराईं, मगर उनकी बात को हर बार अनसुना कर दिया गया। पालिका के सफाईकर्मी नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंचते और जहां पहुंचते भी हैं, वहां केवल खानापूरी करके चले जाते हैं। कूड़ा उठाने वाले वाहनों की अनियमितता के चलते कई-कई दिनों तक चौराहों पर पड़ा कचरा सड़ता रहता है, जिससे उठने वाली सड़ांध ने लोगों का सांस लेना तक दूभर कर दिया है।
एक तरफ जहां राज्य के मुख्यमंत्री शहरों को स्वच्छ, सुंदर और नागरिकों के रहने योग्य बनाने के लिए निरंतर सख्त निर्देश जारी करते रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय पालिका तंत्र इन सभी आदेशों की खुलेआम अनदेखी करने में लगा है। शासन की प्राथमिकताओं और जनहित से जुड़े स्वच्छता अभियानों को धरातल पर उतारने में स्थानीय तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ है। न तो कूड़ा निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई दे रही है और न ही कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने का कोई प्रयास नजर आता है।
उल्लेखनीय है कि पिछले अधिशासी अधिकारी (ईओ) के तबादले के बाद जब नए ईओ ने कार्यभार संभाला था, तब नगरवासियों के मन में एक नई उम्मीद जगी थी। नागरिकों को भरोसा था कि नया नेतृत्व आते ही कार्यशैली बदलेगी, लापरवाह कर्मचारियों पर शिकंजा कसा जाएगा और शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। मगर कुछ ही समय में जनता की यह उम्मीद पूरी तरह निराशा में बदल गई। नए अधिकारी के आने के बाद हालात सुधरने के बजाय और अधिक बदतर हो गए हैं। प्रशासनिक उदासीनता, निगरानी की कमी और प्रभावी कार्ययोजना के अभाव में समूची सफाई व्यवस्था ध्वस्त होकर रह गई है, जिससे पूरा शहर गंदगी और बदहाली के साए में जीने को मजबूर है।