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चंपत राय बंसल और अनिल मिश्र का मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी बतौर इस्तीफ़ा स्वीकार
अयोध्या श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने सोमवार शाम की बैठक में एक राय से चार दशक अयोध्या श्रीराम मंदिर से प्रमुखता से जुड़े रहे विहिप के बड़े पदाधिकारी चंपत राय बंसल और अनिल मिश्र का मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी बतौर इस्तीफ़ा स्वीकार किया गया। दान चढ़ावे प्रकरण की FIR दर्ज कराने वाले कृष्ण मोहन को चंपत राय की जगह अस्थाई महासचिव ट्रस्ट का नियुक्त किया गया है। कोषाध्यक्ष ने RJB परिसर में मीडिया को बताया दान की हुई रामचरितमानस समेत हर पदार्थ वस्तु (संख्या दो हजार से अधिक) ट्रस्ट के पास सुरक्षित है वो भी रिकॉर्ड के साथ।राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में दावा जताया गया था नृत्य गोपाल दास जी ने साफ कह दिया था कि अगर चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव बैठक में मौजूद रहेंगे, तो वे बैठक में शामिल नहीं होंगे। इसी नाराज़गी और शर्त के बाद इन तीनों को सोमवार की ट्रस्ट बैठक से दूर रहने के लिए कहा गया। इसके बाद ही ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी बैठक में शामिल हुए।
अयोध्या ट्रस्ट की बैठक के बाद कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरी द्वारा मीडिया को दिया गया बयान-: 22 जुलाई को ट्रस्ट के साथ एक बार फिर सभी बैठेंगे,हम उम्मीद करते हैं तब तक राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की फ़ाइनल रिपोर्ट आ जाएगी।उस बैठक में हम नए न्यासी की नियुक्ति करेंगे और कृष्ण मोहन ट्रस्ट के रोजाना की गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए कार्यवाहक महासचिव बनाये गए हैं। मंदिर और ट्रस्ट के बीच बेहतर कामकाज और समन्वय के लिए ट्रस्टियों ने 3 सदस्यीय समिति स्थापित की है एक रिटायर्ड जज प्रमोद कोहली और दो रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ले.जनरल विष्णुकांत, ले.जनरल सुरेश हावड़े को कार्यकारी कमेटी में रखा गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार दान और खर्च का बड़ा हिसाब सामने रखा है। ट्रस्ट के मुताबिक राम मंदिर निर्माण के लिए अब तक 3264 करोड़ रुपए दान प्राप्त हुआ, जिसमें से 2370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण और पूंजीगत कार्यों पर खर्च किए गए हैं। ट्रस्ट ने बताया कि मंदिर बनने के बाद 31 मार्च 2026 तक 482 करोड़ रुपए चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुए। इसमें से 391 करोड़ रुपए मंदिर संचालन में खर्च हुए हैं, जबकि बाकी राशि बैंक खातों में उपलब्ध है। ट्रस्ट के अनुसार मंदिर को अब तक 2926 भेंट प्राप्त हुई हैं। चांदी की वस्तुओं को गलाकर छड़ों के रूप में सुरक्षित रखने की बात भी ट्रस्ट ने कही है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी और रामधन गबन विवाद के बीच ट्रस्ट की ओर से यह अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय ब्यौरा सार्वजनिक करना माना जा रहा है।