सभी बहुमंज़िली इमारतों की सुरक्षा समीक्षा करे सरकार, केवल कोचिंग सेंटर में आग नहीं लगती

सभी बहुमंज़िली इमारतों की सुरक्षा समीक्षा करे सरकार, केवल कोचिंग सेंटर में आग नहीं लगती

आलोक वर्मा संवाददाता।

*लखनऊ* श्री चित्रगुप्त जी महाराज समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता धीरेश श्रीवास्तव ने लखनऊ के अग्निकांड पर कड़ा रोष जताते हुए सरकारी तंत्र को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि केवल कोचिंग सेंटरों पर दिखावे की धरपकड़ करके अफसर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। आग किसी को बताकर नहीं लगती, इसलिए कोचिंगों की तरह ही सूबे के हर छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और होटल की सुरक्षा व्यवस्था जांची जानी चाहिए। रेस्टोरेंट और होटलों के भीतर चल रहे कमर्शियल गैस सिलेंडर और भारी बिजली लोड सीधे तौर पर हादसों को दावत दे रहे हैं। ऐसे में जांच के नाम पर चुनिंदा ठिकानों को निशाना बनाना और बाकियों को छोड़ देना अब नहीं चलेगा।
शहरों में नियमों को ताक पर रखकर खड़ी की गईं बहुमंजिला इमारतें आज जनता के लिए खतरा बन चुकी हैं। व्यावसायिक इमारतों में बने आपातकालीन रास्तों (फायर एग्जिट) पर या तो ताले लटके हैं या उन्हें कबाड़खाना बना दिया गया है। सरकार को चाहिए कि ऐसी हर एक बहुमंजिला इमारत का फौरन अनिवार्य ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’ कराए और डिफाल्टर पाई जाने वाली बिल्डिंगों को बिना किसी रसूख या दबाव के तुरंत सील करे। किसी भी रसूखदार को लोगों की जान दांव पर लगाने का कोई हक नहीं है।
धीरेश श्रीवास्तव ने जमीनी हकीकत उजागर करते हुए कहा कि ज्यादातर अग्निकांड ‘शॉर्ट सर्किट’ की वजह से होते हैं। इसके लिए पुरानी वायरिंग को बदलने और एक कड़ा ‘इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट’ लागू करने की सख्त जरूरत है। इसके साथ ही, पुराने और घने बाजारों की संकरी गलियों से अतिक्रमण हटाया जाए ताकि आपातकाल में फायर ब्रिगेड बिना रुकावट पहुंच सके, और हर इलाके में ‘फायर हाइड्रेंट’ पॉइंट्स चालू किए जाएं। केवल कागजी और विभागीय जांच के बजाय इस पूरी प्रक्रिया में स्वतंत्र एक्सपर्ट्स को शामिल करना और होटल स्टाफ को ‘मॉक ड्रिल’ के जरिए ट्रेनिंग देना बेहद जरूरी है।
उन्होंने तंत्र के भ्रष्टाचार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि हादसों के बाद केवल बिल्डिंग मालिकों पर केस दर्ज कर खानापूर्ति की जाती है, जबकि रिश्वत लेकर ‘फायर एनओसी’ बांटने वाले भ्रष्ट अफसर साफ बच निकलते हैं। बिना वेंटिलेशन और बिना निकास वाली इमारतों को हरी झंडी मिलना सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार का सबूत है। अब नियम बदलना होगा; अगर किसी मान्यता प्राप्त इमारत में हादसा होता है, तो पहली एफआईआर एनओसी जारी करने वाले अफसर पर दर्ज होनी चाहिए। जब तक भ्रष्ट अधिकारियों को जेल नहीं भेजा जाएगा, तब तक यह खूनी खेल बंद नहीं होगा। सरकार को यह समझना होगा कि कागजी खानापूर्ति का वक्त खत्म हो चुका है; अब जमीन पर सख्त कार्रवाई, भारी जुर्माने और अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण की जरूरत है।

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