आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

70 वर्षीय विकलांग वृद्धा को प्रशासन ने छोड़ा बेसहारा!
“पहले आधार बनवाओ, तभी मिलेगी पेंशन” — डीएम कार्यालय से मदद से इनकार का आरोप
जौनपुर। एक ओर सरकार वृद्ध, निराश्रित और दिव्यांग लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन देने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जौनपुर में 70 वर्षीय विकलांग वृद्धा रन्नो वर्मा मदद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। आरोप है कि आधार कार्ड न होने के कारण उन्हें न वृद्धा पेंशन मिल रही है और न ही दिव्यांग पेंशन, जबकि वह शारीरिक रूप से असहाय और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी हैं।
पीड़िता का कहना है कि उनके पति ने मारपीट कर उन्हें घर से निकाल दिया। न्याय की आस में उन्होंने फरवरी 2025 में फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण का मुकदमा दायर किया, लेकिन महीनों बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अब हालत यह है कि जीवनयापन तक संकट में है।
मंगलवार को वृद्धा ने अपने भतीजे के माध्यम से नवागत जिलाधिकारी Samuel Paul से घर पर आधार कार्ड बनवाने तथा वृद्धा और दिव्यांग पेंशन दिलाने के लिए मदद की गुहार लगाई। आरोप है कि जिलाधिकारी कार्यालय के सहायकों ने साफ शब्दों में कह दिया — “पहले खुद आधार कार्ड बनवा लीजिए, तभी कोई मदद हो पाएगी।”
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वृद्धा चलने-फिरने में असमर्थ हैं, तो आखिर वह स्वयं आधार केंद्र तक कैसे पहुंचें? परिवार का कहना है कि उन्हें प्रशासन से केवल इतनी उम्मीद थी कि मानवीय आधार पर आधार कार्ड बनवाने में सहायता कर दी जाए, लेकिन वहां से भी निराशा ही हाथ लगी।
मामले ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के अधिकारों की बात करने वाली व्यवस्था में यदि एक असहाय वृद्धा को पहचान पत्र तक बनवाने में मदद नहीं मिल पा रही, तो योजनाओं के दावों की हकीकत क्या है?
परिजनों ने प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप कर तत्काल आधार कार्ड बनवाने, पेंशन स्वीकृत करने और वृद्धा को संरक्षण दिलाने की मांग की है।