ब्यूरो,

शराब घोटाले में आरोप मुक्त होने पर केजरीवाल को अन्ना हजारे की सलाह कहा, अब देश के लिए काम करें
दिल्ली की अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाते हुए सीबीआई (CBI) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि उसे शराब नीति बनाने में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा नहीं मिली।
दिल्ली की एक अदालत द्वारा कथित आबकारी नीति (शराब नीति) मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को आरोप मुक्त किए जाने के फैसले का उनके गुरु और प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का भी बयान सामने आया है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में पत्रकारों से बात करते हुए अन्ना ने अदालती फैसले का सम्मान करने की बात कही है।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रणेता अन्ना हजारे ने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश की सुचारू व्यवस्था का श्रेय हमारी न्यायपालिका को जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा देश न्यायपालिका के दम पर चलता है। यह देश की सर्वोच्च प्रणाली है। यदि हमारे पास एक मजबूत न्यायपालिका नहीं होती, तो अपराधी हावी हो जाते और देश में दंगों जैसी स्थिति पैदा हो जाती। अदालत ने जो फैसला दिया है उसे स्वीकार करना अनिवार्य है।” अन्ना ने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। अदालत का यह निर्णय अंतिम है और इसे चुनौती नहीं दी जानी चाहिए।
मार्च 2024 में जब केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, तब भी अन्ना हजारे ने उनकी तीखी आलोचना की थी। उस समय अन्ना ने इसे करोड़ों देशवासियों के भरोसे के साथ विश्वासघात बताया था। “उस समय मैंने जो कुछ भी कहा था, वह अदालती फैसले से पहले की बात थी। तब आरोप हवा में थे और कोई कानूनी निष्कर्ष नहीं निकला था। अब चूंकि न्यायपालिका ने अपना फैसला दे दिया है कि उनकी कोई भूमिका नहीं थी, तो हमें उसे मानना होगा।”
अन्ना हजारे ने 2011 के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन के दिनों को याद करते हुए अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को अपने कार्यकर्ता के रूप में संबोधित किया। अन्ना ने एक बार फिर अपना पुराना रुख दोहराया कि जब आंदोलन ने राजनीतिक मोड़ लिया और ‘आम आदमी पार्टी’ का गठन हुआ, तब उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया था। जब अन्ना से पूछा गया कि वह अब केजरीवाल को क्या सलाह देने पर कहा कि, समाज और देश के लिए काम करें। केवल अपने बारे में या अपनी पार्टी के बारे में न सोचें।” ।