आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
2026 इंडिया ओपन: एक बार फ़िर अव्यवस्थाएं खेल पर पड़ीं भारी
भारत में हाल ही में संपन्न हुआ बैडमिंटन 2026 इंडिया ओपन खेल से ज़्यादा विवादों और अव्यवस्थाओं की वजह से चर्चा में रहा। यह वही टूर्नामेंट है, जिसे भारत की खेल क्षमता और अंतरराष्ट्रीय आयोजन कौशल का प्रदर्शन माना जाना था। लेकिन हकीकत ने एक बार फिर हमारे खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनेजमेंट की कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया।
सबसे ज्यादा शर्मनाक और वायरल हुआ वह वाकया, जब मैच के दौरान कोर्ट पर कई बार चिड़िया की बीट गिर गईं। अंतरराष्ट्रीय प्रसारण में यह दृश्य पूरी दुनिया ने देखा। हर बार खेल को रोकना पड़ा, खिलाड़ी असहज हुए और आयोजकों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। यह कोई मामूली घटना नहीं थी, बल्कि यह बताने के लिए काफी थी कि बुनियादी स्तर पर तक सुरक्षा और मेंटेनेंस पर ध्यान ही नहीं दिया गया था।
इसके अलावा खिलाड़ियों ने प्रैक्टिस कोर्ट की कमी, अभ्यास के तय समय में बार-बार बदलाव, और लॉजिस्टिक्स की अव्यवस्था को लेकर भी नाराज़गी जताई। कुछ विदेशी खिलाड़ियों को मैच से ठीक पहले तक यह स्पष्ट नहीं था कि वे कब और कहां अभ्यास कर पाएंगे। दर्शकों को टिकट काउंटर, एंट्री गेट और बैठने की व्यवस्था को लेकर भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
यह पूरा विवाद किसी एक दिन या एक गलती का नतीजा नहीं है। यह भारत में खेल आयोजनों की उस मानसिकता को दिखाता है, जहां इवेंट मैनेजमेंट को सेकेंडरी और प्रचार को प्राइमरी मान लिया जाता है। हम खिलाड़ियों से पदक, सम्मान और गौरव की उम्मीद करते हैं, लेकिन उन्हें ज़रूरी माहौल देने में बार-बार चूक जाते हैं।
खेल इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ स्टेडियम खड़े कर देने से नहीं बनता। वह प्लानिंग, प्रोफेशनलिज़्म, जवाबदेही और खिलाड़ी-सम्मान से बनता है। क्या भारत सच में वैश्विक खेल मंच पर गंभीरता से लिये जाने के लिए जरूरी है सबक लेगा?