आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
जौनपुर नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार के आरोप पर कार्यवाही क्यूं नहीं
संदिग्ध LED खरीद और बिना टेंडर कार्य आवंटन
जौनपुर। नगर पालिका परिषद जौनपुर में हाल ही में सामने आए दो गंभीर मामले 900 LED लाइट खरीद घोटाला और बिना टेंडर करोड़ों के विकास कार्य आवंटन ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन मामलों में ईओ और जिला प्रशासन के बीच असामान्य तालमेल देखने को मिल रहा है, जिसके कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
LED लाइट घोटाला
नगर पालिका परिषद द्वारा 900 LED लाइटों की खरीद में कई अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि—
लाइटों की कीमतें बाजार दर से कई गुना अधिक थीं।
पुराना सामान नया दिखाकर बिल पास किया गया।
खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था।
इन बिंदुओं ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। स्थानीय लोगों ने ईओ और जिला प्रशासन के बीच संभावित समझौता होने का भी संदेह जताया है।
बिना टेंडर कार्य आवंटन
नगर पालिका परिषद के दस्तावेज़ों के अनुसार कई करोड़ रुपये के कार्य ऐसे पाए गए हैं, जिन्हें बिना निविदा/टेंडर के आवंटित किया गया।
बोर्ड मीटिंग में सभासदों ने इस मुद्दे को उठाया।
बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह प्रशासनिक उदासीनता और ईओ के पक्ष में नरमी की ओर संकेत करता है। जिला प्रशासन की सत्यापन और अनुमोदन प्रक्रिया इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच की मांग और जनता की प्रतिक्रिया
सामाजिक कार्यकर्ता धीरेश श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि LED घोटाले और बिना टेंडर कार्य आवंटन की पूर्ण और स्वतंत्र जांच की जाए।
ईओ के पिछले चार वर्षों के सभी निर्णय, अनुबंध, भुगतान आदेश और फाइलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
धीरेश श्रीवास्तव का कहना है:
“अनियमितताएँ साफ दिख रही हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, यह जवाबदेही और शासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।”
स्थानीय नागरिक भी पूछ रहे हैं कि— यदि भ्रष्टाचार साफ दिख रहा है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
जनता का कहना है कि मुख्यमंत्री स्तर से तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि सच सामने आए और भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।