आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,
मुकेश साहनी के बयान से मचा सियासी बवाल, महागठबंधन में बढ़ी बेचैनी
बिहार की सियासत में इन दिनों वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी के बयान ने हलचल मचा दी है। साहनी ने कहा कि “समाज ने लालू यादव को मसीहा माना लेकिन अब वक्त बदल गया है”, जिसके बाद महागठबंधन के भीतर खींचतान तेज हो गई है। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में महागठबंधन की एकता पर सवाल के तौर पर देखा जा रहा है।
मुकेश साहनी ने कहा कि पिछड़ों और दलितों को अब नए नेतृत्व की जरूरत है, जो उन्हें आगे बढ़ा सके। उनके अनुसार, “हम लालू यादव का सम्मान करते हैं, लेकिन आज की राजनीति नई सोच और नए चेहरों की मांग कर रही है।” इस बयान के बाद राजद नेताओं ने साहनी पर तीखा हमला बोला और कहा कि वे विपक्षी दलों के इशारे पर महागठबंधन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
राजद प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “लालू यादव ने ही बिहार की राजनीति में हाशिए पर पड़े वर्गों को आवाज दी। जिन्हें आज पहचान मिली है, वे उन्हीं की बदौलत राजनीति में टिके हैं।” वहीं जेडीयू और बीजेपी नेताओं ने इस विवाद का फायदा उठाने की कोशिश की और कहा कि साहनी ने केवल सच्चाई कही है।
सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन के अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। मुकेश साहनी पहले भी टिकट बंटवारे और सीटों के तालमेल को लेकर असंतोष जताते रहे हैं। उनका यह बयान विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साहनी की नाराजगी अगर बढ़ी, तो महागठबंधन को आगामी चुनावों में नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं वीआईपी पार्टी के समर्थकों का कहना है कि साहनी ने सिर्फ सामाजिक वास्तविकता की बात की है। अब देखना होगा कि राजद इस बयानबाजी को संभाल पाता है या बिहार की राजनीति में एक नया समीकरण बनता है।