अलग हटके लिखना ही हिन्दी साहित्य को रख सकता है ज़िंदा

अलग हटके लिखना ही हिन्दी साहित्य को रख सकता है ज़िंदा

सुमन बाजपेयी

डीयू के सत्यवती कॉलेज में फ्लाईड्रीम पब्लिकेशन ने किया किताबें ज़रा हटके उत्सव का पहला आयोजन
डीयू के सत्यवती कॉलेज में फ्लाईड्रीम पब्लिकेशन ने एक दिवसीय ‘किताबें ज़रा हटके उत्सव’ का आयोजन किया इसमें 50 से अधिक लेखक और 1000 से अधिक श्रोता और पाठक पहुंचे। पहला सत्र हिंदी में हॉरर फिक्शन रहा। हॉरर लिखने वाले लेखक देवेंद्र प्रसाद ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म ने बहुत कुछ बदला है, इसलिए आज के युवाओं को आप सिर्फ पढ़ने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। उनकी किताब ‘कब्रिस्तान वाली चुड़ैल’ को डेढ़ करोड़ ज्यादा लोग ऑडियो में सुन चुके हैं। सुप्रसिद्ध लेखक परशुराम शर्मा ने कहा कि दरअसल युवा वर्ग ही नहीं, बल्कि हर वर्ग शुरू से ही हॉरर कहानियों को पढ़ने में खूब रुचि लेता रहा है, पर इन दिनों प्रकाशकों द्वारा इस विधा में कम छापा जा रहा है। फ्लाई ड्रीम्स इस दिशा में अच्छा काम कर रहा है।
दूसरा सत्र हिंदी में साइंस फिक्शन और फैंटेसी की दुनिया पर आधारित था। सत्र का संचालन संपादक जयंत कुमार ने किया। लेखक अतुल शर्मा ने कहा आप साइंस फिक्शन में उत्साह में आकर बहुत कुछ लिख सकते हैं, लेकिन आपका संपादक पठनीयता को ही अहमियत देगा। आप जो लिख रहे हैं अगर वह आपको रोमांचित नहीं कर पा रहा है तो वह नीरस बन जाएगा। हिंदी पाठकों को हमें साइंस फिक्शन में कुछ अलग हटकर देना होगा, वरना अनुवादित किताबों तक ही उनका पठन इस विधा में सीमित रहेगा! लेखक समीर गांगुली ने कहा विज्ञान कथाओं में जो कल्पना की जाती है बहुत हद तक झूठ भी होती है। विज्ञान प्रगति पत्रिका के संपादक डॉ. मनीष गोरे ने दैनिक जीवन की घटनाओं में विज्ञान का अवलोकन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया हिंदी में मूल साइंस फिक्शन किताबों का होना बहुत जरूरी क्यों है।
तीसरे सत्र में माईथो फिक्शन और सुपर हीरो की दुनिया पर चर्चा की गई। इस सत्र में अभिलाष दत्ता, नम्रता सिंह और नृपेंद्र शर्मा वक्ता के रूप में उपस्थित थे। लेखक और संपादक राम पुजारी ने उनसे हिंदी किताबों में सुपर हीरोज के उदय और मिथक और यथार्थ का मेल के बारे में चर्चा की। हुई। चौथे सत्र में किशोर साहित्य पर व्यापक चर्चा हुई जिसका संचालन किया विकास नैनवाल ने। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और अनुवादक सुमन बाजपेयी के अलावा, नेहा अरोरा और प्रांजल सक्सेना थे। किशोर साहित्य लेखन में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इस पर अपनी बात रखते हुए सुमन बाजपेयी ने कहा कि किशोर साहित्य उपलब्ध ही नहीं है, इसलिए वे वयस्कों के लिए लिखे जाने वाले साहित्य को पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हिंदी में पुस्तकें उपलब्ध होंगी तो किशोर अवश्य ही उन्हें पढ़ेंगे और अंग्रेजी साहित्य की ओर उन्मुखता कम होगी।
पांचवें सत्र में हिंदी में बाल पॉकेट्स बुक्स की दुनिया पर सवाल-जवाब हुए। इसमें योगेश मित्तल ने अपनी बात रखी, जिन्होंने किशोर साहित्य का लेखन पहले और मौजूदा दौर में कैसा है, पर प्रकाश डाला। छठा सत्र फ्लाई ड्रीम्स कॉमिक्स की चौपाल नाम से था। इस सत्र में मोहित शर्मा से अनमोल दुबे ने चर्चा की। मोहित ने संदीप मुरारका की लिखित भज्जू श्याम और गुलाबो सपेरा की कहानी को कॉमिक्स के रुप में ढाला है।
सातवां सत्र, ‘किताबें जरा हटके’ में फ्लाई ड्रीम्स के चिल्ड्रन विंग्स के मुख्य संपादक और लेखक ‘मिथिलेश गुप्ता’ और संपादकीय हेड ‘जयंत कुमार’ से बुकवाला के संस्थापक अनमोल दुबे ने चर्चा की। अनमोल ने ज़रा हटके किताबें विषय रखने का अर्थ पूछा। इस पर मिथिलेश ने कहा कि अलग हटके लिखना ही साहित्य को ज़िंदा रख सकता है हिंदी की मूल किताबों में आप देखेंगे सिर्फ एक जैसी ही विधा में किताबें लिखकर हिट होने का एक फार्मूला बना हुआ है।, हैरी पॉटर की जितनी हिंदी अनुवादित किताबें बिक जाती हैं, मूल हिंदी में उसका आधा बिकना भी मुश्किल होता नजर आता है। वजह है कि हम कुछ नया नहीं रच रहे हैं। इसलिए हमने किताबें ज़रा हटके को ही अपनी थीम बना लिया है। जयंत कुमार ने कहा कि आज के दौर में किताबों का कवर अच्छा होना जरूरी है लेकिन उसके बाद भी फ्लाई ड्रीम्स अक्सर उसमें बदलाव करता है। हम प्रयोगधर्मी विधाओं में खूब कार्य कर रहे हैं!

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