आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

अध्यात्म, दर्शन और जीवन-दर्शन का संगम है “हेरत हेरत हे सखी”
शिष्यों ने कहा: यह पुस्तक गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत प्रमाण
नई दिल्ली। फ्लाइड्रीम्स पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित जगत नारायण पाण्डेय की पुस्तक “हेरत हेरत हे सखी” का विमोचन एक गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षा, साहित्य और समाज के अनेक प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित भारतीय भाषा वैज्ञानिक डॉ विमलेश कांति वर्मा ने की।
ग्यारह अध्यायों वाली यह कृति अध्यात्म, दर्शन और जीवनानुभवों का ऐसा समन्वय प्रस्तुत करती है जिसमें गीता और उपनिषद के सूत्रों से लेकर कबीर और गालिब के संदर्भ मिलते हैं। सरल और प्रवाहपूर्ण भाषा में लिखी गई यह पुस्तक पाठकों को आत्ममंथन और आत्मसंवाद के लिए प्रेरित करती है।
मुख्य अतिथि ग्लोबल कंपनी में उपाध्यक्ष पद से सेवा निवृत दीपेन्द्र सहाय ने कहा कि “जगत नारायण जी केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि जीवन के मार्गदर्शक थे। यह पुस्तक उनकी शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है।”
विश्व हिन्दू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री मुकेश जी ने कहा कि “हमारे समाज को ऐसे ही आध्यात्मिक और मूल्याधारित साहित्य की जरूरत है। यह कृति आने वाले समय में युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखाएगी।”
मॉरिशस की Bhojpuri Speaking Union की चेयरपर्सन और पूर्व उप प्रधानमंत्री की पत्नी डॉ सरिता बुद्धू ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “भारतीय अध्यात्म का वैश्विक महत्व है। यह पुस्तक विदेशों में भी भारतीय संस्कृति के संदेश को फैलाने का काम करेगी।”
शम्भू शरण पाण्डेय, जो लेखक के छोटे भाई और सेवा निवृत इंजीनियर हैं, ने भावुक होते हुए कहा कि “भैया का जीवन अनुशासन और समर्पण का प्रतीक था। आज यह पुस्तक उनके आदर्शों की जीवित स्मृति बनकर हमारे सामने है।”
गगन दुदानी ने अपने प्रिय गुरु को याद करते हुए इस किताब के लिखने के पीछे की कहानी को बताया कि “कैसे कोरोना काल में उनके द्वारा डाले गए एक स्टेटस को देख कर गुरु जी ने जब उसका अर्थ पूछा और जब गगन उसका सही अर्थ नहीं बता पाए तो लेखक जगत नारायण पाण्डेय ने उन्हें एक चिठ्ठी के माध्यम से अर्थ बताया जहाँ से इस किताब की शुरुआत हुई।“
आभार लेखक रत्नेश पाण्डेय ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “यह पुस्तक मेरे बड़े पिताजी के विचारों और जीवन-दर्शन को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का मेरा छोटा सा प्रयास है।”
समारोह का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि “हेरत हेरत हे सखी” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन-दृष्टि है जो समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रकाशपुंज बनेगी।
समारोह में जानी मानी कवयित्री नंदिनी श्रीवास्तव, प्रख्यात गजलकार अनिल कुलश्रेष्ठ, प्रतिष्ठित गीतकार मनोज भावुक, वचनेश पाण्डेय, शैलेश पाण्डेय फ्लाइड्रीम्स पब्लिकेशन्स की ओर से जयंत कुमार और मिथलेश गुप्ता सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। जगत नारायण पाण्डेय जी के शिष्यों में विवेक उपाध्याय, संजय सिंह, शरद राकेश, सुरोजीत गुप्ता, सुप्रियो मुखर्जी, संजय मेवाड़, राहुल, रविश पाण्डेय आदि ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही ऑनलाइन भी पांडे जी के भतीजे श्री अरविंद पांडेय और उनके शिष्य श्री सुबिंद जी, श्री रॉबिन रस्तोगी जी और अन्य शिष्यों ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सभी ने एक स्वर में कहा कि “पुस्तक गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत प्रमाण है और हमें अपने गुरु की शिक्षा याद दिलाती है।”
मंच संचालन युवा लेखक और पत्रकार अनमोल दुबे तथा स्मृतिशेष श्री जगत नारायण पांडेय जी की पौत्री व्याख्या पाण्डेय ने किया।