बारिश के दौरान खुले नाले और करंट की चपेट में आकर प्राची मिश्रा की मौत के बाद परिजनों का दर्द और गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा    परिजनों की दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग 

बारिश के दौरान खुले नाले और करंट की चपेट में आकर प्राची मिश्रा की मौत के बाद परिजनों का दर्द और गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा    परिजनों की दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग 

 

जौनपुर। मछलीशहर पड़ाव पर बारिश के दौरान खुले नाले और करंट की चपेट में आकर 24 वर्षीय प्राची मिश्रा की मौत के बाद परिजनों का दर्द और गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। मृतका की बड़ी बहन साक्षी मिश्रा गुरुवार को परिवार के सदस्यों के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची और दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। लेकिन एसपी की अनुपस्थिति में मौजूद सीओ सिटी देवेश कुमार सिंह ने मामले की जांच लंबित होने का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया।

“जांच लंबित है तो निलंबन किस आधार पर?”
सीओ सिटी के इस जवाब पर साक्षी मिश्रा भड़क उठीं। उन्होंने तर्क दिया कि “यदि अभी तक जांच पूरी नहीं हुई, तो आखिरकार नगर पालिका परिषद के दो कर्मचारियों और दो जूनियर इंजीनियर को किस आधार पर निलंबित किया गया? जब निलंबन हो सकता है, तो एफआईआर क्यों नहीं?”

साक्षी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि यह जिला प्रशासन की दोहरी नीति है। एक तरफ प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड कर देता है, वहीं दूसरी तरफ दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने से बच रहा है।

“प्राची की मौत हादसा नहीं, प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा”
साक्षी मिश्रा ने भावुक होकर कहा कि उनकी बहन प्राची जीवन से भरपूर, सकारात्मक और भविष्य के सपनों से भरी हुई युवती थी। लेकिन नगर पालिका की खुली नालियां, पीडब्ल्यूडी की टूटी-फूटी सड़कें और बिजली विभाग के लटकते तारों ने उसकी जिंदगी छीन ली।

उन्होंने आरोप लगाया कि “यह किसी सामान्य हादसे की मौत नहीं है, बल्कि विभागीय अधिकारियों की गंभीर लापरवाही और पदेन कर्तव्यों की उपेक्षा है। इन्हें पूरी जानकारी थी कि इस तरह की स्थितियां किसी भी क्षण मौत का कारण बन सकती हैं, फिर भी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।”

जिला प्रशासन और शासन कटघरे में
साक्षी ने मीडिया के सामने जिला प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बचाने के लिए केवल निलंबन की औपचारिकता पूरी की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया –
“जब तक किसी विभागीय अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होगी और गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक यह न्याय अधूरा रहेगा।”

उन्होंने शासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। “तीन निर्दोष लोगों की मौत के बाद भी यदि सिर्फ फाइलों में कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी, तो यह शासन की संवेदनहीनता और लापरवाही को उजागर करता है।”

साक्षी मिश्रा ने कहा कि यदि उनकी बहन प्राची की मौत के दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे ।

इस घटना ने जौनपुर में व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि आखिर कब तक टूटी सड़कों, खुले नालों और लटकते तारों की कीमत निर्दोष जिंदगियों को चुकानी पड़ेगी?

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