पहले साढ़े सात लाख मुआवजा देने को कहा फिर मुकर गया प्रशासन

आलोक वर्मा, जौनपुर ब्यूरो,

पहले साढ़े सात लाख मुआवजा देने को कहा फिर मुकर गया प्रशासन

 

जौनपुर। पिछले दिनों शहर में करेंट लगने हुई दुखद मौत में प्रशासन ने मृतकों के परिवार को साढ़े सात लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की थी लेकिन घटना के दस दिन बाद अपनी बात से पलटते हुए मात्र पांच लाख रुपए मुआवजा देने की बात कही है।
इतने संवेदनशील मामले में ये कार्यवाही से जनता में बेहद रोष है और अगर नियम पांच लाख रुपए मुआवजा देने का है तो साढ़े सात लाख रुपए मुआवजा देने की बात क्यों की गई?
क्या प्रशासन योगी सरकार को बदनाम करने पर तुला हुआ है?
ये प्रश्न स्वाभाविक रूप से सामने आता है। पहले तो लापरवाही बरतने के कारण हुई दुखद घटना जिसमें तीन नौजवानो की मार्मिक मृत्यु हुई जिसने जनपद को हिलाकर रख दिया फिर नगर पालिका अध्यक्ष का रवैया जो आजतक पीड़ित परिवार से मिलने नहीं आए।
इस मामले को नगर विधायक और मंत्री गिरीश यादव और प्रभारी मंत्री ए के शर्मा को प्राथमिकता देते हुए पीड़ित परिवार को अधिक से अधिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। पीड़ित परिवार के लोगों के संपर्क में लगातार बने रहकर लोगों के दुख दर्द को दूर करने का प्रयास करना चाहिए था। मगर प्रशासन का ये रवैया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के एजेंडे के अनुरूप नहीं है और ये स्थिति भाजपा के समर्थकों को भी उद्वेलित कर रही है। आमजन मानस में इस मामले को लेकर जो जज्बा है उसकी संवेदनशीलता को पार्टी और सरकार दोनों को समझना चाहिए।

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