ब्यूरो,

रूस में 5000 km अंदर घुसकर ड्रोन्स ने मचाई तबाही, भारत के लिए भी है यह सीखने वाली एक बात
यूक्रेन ने रूस के अंदर ड्रोन पहुंचा दिए और सीमा से 5000 किलोमीटर भीतर तक जाकर मार की। इस हमले में यूक्रेन ने रूस के कई एयरबेस तबाह कर दिए। यूक्रेन के ये ड्रोन हमले इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उसने रूस के अंदर घुसकर मार की। यह हमला फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन्स यानी FPV के जरिए किए गए।
रूस से यूक्रेन का युद्ध बीते ढाई सालों से चल रहा है। इस अवधि में यूक्रेन को रूस के हाथों में बड़ी मार झेलनी पड़ी है। लेकिन पिछले दिनों उसने बाजी तब पलट दी, जब किसी तरह उसने रूस के अंदर ड्रोन पहुंचा दिए और सीमा से 5000 किलोमीटर भीतर तक जाकर मार की। इस हमले में यूक्रेन ने रूस के कई एयरबेस तबाह कर दिए। यूक्रेन के ये ड्रोन हमले इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उसने रूस के अंदर घुसकर मार की और बिना किसी दृश्य दुश्मन के ही रूस को सबक भी सिखा दिया। यह हमला फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन्स यानी FPV के जरिए किए गए।
इन ड्रोन्स को ट्रकों के माध्यम से रूस के अंदर भेजा गया और फिर इन्होंने धमाके कर दिए। इन ड्रोन हमलों में रूस को बड़ा नुकसान पहुंचा है और इस बात को पुतिन प्रशासन ने भी स्वीकार किया है। इस ड्रोन हमले ने साबित किया है कि अब वारफेयर के तरीके, तकनीक और प्रकृति में बदलाव आ गया है। भारत जैसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील देश के लिए भी ड्रोन वारफेयर एक गंभीर चुनौती है। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर जैसे इलाके में तो यह महत्वपूर्ण है। यहां अकसर पाकिस्तान की ओर से ड्रोन अटैक की कोशिशें होती रही हैं।
भारत में ड्रोन वारफेयर भी एक नई चुनौती के रूप में बीते करीब दो वर्षों में उभरा है। भारत में भी जम्मू से लेकर पंजाब तक के क्षेत्र में पाकिस्तान से आने वाले ड्रोनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ड्रोन एक नई चुनौती हैं, जो जमीन पर निगरानी के बाद अब आसमान पर भी पैनी नजर बनाए रखने को विवश करते हैं। बिना किसी दुश्मन के एक डिवाइस कैसे पूरी सुरक्षा प्रणाली में सेंध लगा सकती है, इसका अध्ययन किया जाना जरूरी है। इस संबंध में लेखिका मेडिया बेंजामिन की पुस्तक ‘ड्रोन वारफेयर: किलिंग बाय रिमोट कंट्रोल’ में विस्तार से ब्योरा दिया गया है। यह पुस्तक ड्रोन वारफेयर की प्रकृति के बारे में बताने वाली दुनिया की पहली किताब है।
दरअसल बीते कुछ सालों में भारत ने ड्रोन हमलों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। भारत की तरफ से ड्रोन अटैक को रोकने वाली तकनीक पर निवेश हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में जब पाकिस्तान ने ड्रोन अटैक की कोशिश की तो भारत ने सभी हमलों को आसमान में ही रोक दिया। फिर भी जानकार मानते हैं कि ड्रोन अटैक को लेकर और सावधानी की जरूरत है। इसके अलावा ड्रोन अटैक से डिफेंस की तकनीक को मजबूत करने के साथ ही अटैक पर भी फोकस करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने कश्मीर से लेकर पंजाब तक में ड्रोन अटैक की कोशिशें की थीं।