कोरोना फिर से ? डरें नहीं, सावधान रहें

कोरोना फिर से ? डरें नहीं, सावधान रहें

विवेक तिवारी, (वरिष्ठ पत्रकार). 

कोविड-19 ने एक बार फिर से दस्तक दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत मे पहला केस जनवरी 2025 में केरल में सामने आया। इस समय मुख्यरूप से भारत, सिंगापुर, हांगकांग, थाईलैंड, चीन इससे प्रभावित क्षेत्र हैं।मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि सिंगापुर में एक हफ्ते में प्रभावितों का आंकड़ा 14 हज़ार जबकि थाईलैंड में कुछ ही दिनों में 6000 से 33000 हो गया । भारत मे कोरोना से प्रभावितों का आंकड़ा 250 के आस पास है। जिससे इतना तो साफ होता है कि इसका विस्तार तेज़ी से होता है हालांकि अधिकांश मामले हल्के हैं। WHO ने इसे “Variant of Interest” घोषित किया है। जब कोई वैरिएंट काफी तेजी से कई देशों में फैल रहा हो और परिणाम उसके मूल स्ट्रेन से अलग और अधिक हों तो WHO उसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट की कैटगरी में डाल देता है।

इस बार के प्रमुख वैरिएंट का नाम JN.1 है जो ओमिक्रोन का ही सब- वैरिएंट है। इसके अलावा KP.2 और KP.1.1 (“FLiRT” वेरिएंट्), LF.7 और NB.1.8 वैरिएंट भी सामने आए हैं जो मूलरूप से JN.1 के ही उप-प्रकार माने गए हैं।

गंभीरता: अधिकांश मामले हल्के हैं। गंभीर मामलों की संख्या कम ही है।जहां तक टीकों की प्रभावशीलता का सवाल है तो माना गया है कि वर्तमान टीके गंभीर बीमारी से सुरक्षा तो प्रदान करते हैं, लेकिन कुछ वेरिएंट्स में संक्रमण से पूरी सुरक्षा नहीं हालांकि संक्रमण का प्रभाव मामूली फ्लू जैसा ही हो रहा है।
विशेष जोखिम समूह: बुजुर्ग, सह-रोग वाले व्यक्ति, और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग।

मुख्य लक्षण: जुकाम, बुखार, खांसी, गंध और स्वाद में कमी।

कितना खतरनाक है नया संक्रमण?
वर्तमान में सामने आए वेरिएंट्स की संक्रमण दर तेज है, लेकिन गंभीरता कम है।

क्या हैं बचाव के उपाय?
1. बूस्टर डोज़ जरूर लें, विशेष रूप से यदि आप उच्च जोखिम समूह में हैं।
2. भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनें।
3. हाथ धोना और सेनिटाइज़र का उपयोग न भूलें।
4. 4. लक्षण दिखने पर तुरंत परीक्षण कराएं।
5. सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

कोरोना खत्म नहीं हुआ है,ये हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है ।अब वह नए रूपों में खुद को ढाल रहा है। इन वैरिएंट्स से डरने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की ज़रूरत है। टीकाकरण, सावधानी और जागरूकता ही हमारे सबसे बड़े हथियार हैं। जब तक वायरस है, तब तक लापरवाही नहीं—यही इस समय की सबसे बड़ी मांग है।

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