सभी को अक्षय तृतीया पर हार्दिक बधाई 🌱🌹
IIआज का पंचांग एवं ग्रहों की स्थितिII


आलोक वाजपेयी ( ज्योतिषाचार्य ),
🕉 शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये।।
अर्थात-: हम भगवान श्री विष्णु का ध्यान करते हैं जो सफ़ेद वस्त्र धारण किये गए हैं, जो सर्वव्यापी हैं, जो चंद्रमा की भांति प्रकाशवान और चमकीलें हैं, जिसके चार हाथ हैं, जिनका चेहरा सदा करुणा से भरा हुआ और तेजमय है, जो समस्त बाधाओं से रक्षा करते हैं।
IIआज का पंचांग एवं ग्रहों की स्थितिII
🕉 श्री गणेशाय नमः, जय श्री कृष्ण 🙏🙏
🙏🙏 सब सुखी व स्वस्थ रहें 🌱🌹
विक्रम संवत 2082
संवत्सर नाम -: सिद्धार्थी
संवत्सर राजा-: सूर्य
संवत्सर मंत्री-: सूर्य
🌕सूर्य उत्तरायण, ऋतु-: ग्रीष्म
सूर्य उदय : प्रातः 5/45
सूर्य अस्त : सायं 6/52
📺 वैशाख मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि
अंग्रेजी दिनांक-: 30/4/2025
दिन-: बुद्धवार
🌕 चंद्रमा-: वृष राशि में
🥳राशि स्वामी-: शुक्र
🌱 आज का नक्षत्र -: रोहिणी सायं 4/18 तक उसके बाद मृगशिरा
💓 नक्षत्र स्वामी – : चंद्र/मंगल
✨️ चंद्रमा का नक्षत्र प्रवेश-:
प्रात: 5/32 से रोहिणी नक्षत्र चरण 3 में
10/55 से रोहिणी नक्षत्र चरण 4 में
सायं 4/18 से मृगशिरा नक्षत्र चरण 4 में
रात्रि 9/47 से मृगशिरा नक्षत्र चरण 2 में
🔥 योग-: शोभ दोपहर 12/02 तक -: शोभन योग को ज्योतिष में एक शुभ योग माना जाता है। यह योग किसी भी कार्य को शुरू करने या किसी शुभ कार्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह योग व्यक्ति को आकर्षक और सुंदर बनाता है।
उसके बाद अतिगन्ड -: अतिगंड योग एक अशुभ समय है। अतिगण्ड की पहली 6 घटी को सभी अच्छे कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इस योग में जन्म लेने वाले जातक का जीवन कष्टकारी होता है।
आज के मुख्य पर्व/भद्रा/पंचक/गन्डमूल आदि
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🪴-: अक्षय तृतीया -: अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है।[1] इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।[2] वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किन्तु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।
इस दिन किया गया आचरण और सत्कर्म अक्षय रहता है।[6]
भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है।[6] भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था।[5] ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी दिन हुआ था।[2] इस दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है और श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए जाते हैं। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं। वृन्दावन स्थित श्री बाँके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं।
अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर समुद्र व गङ्गा स्नान करके और शान्त चित्त होकर, भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने का प्रावधान है। नैवेद्य में जौ व गेहूँ का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पित किया जाता है। तत्पश्चात फल, फूल, पात्र, तथा वस्त्र आदि दान करके ब्राह्मणों को दक्षिणा दी जाती है।[4] ब्राह्मण को भोजन करवाना कल्याणकारी समझा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए तथा नए वस्त्र और आभूषण पहनने चाहिए। गौ, भूमि, स्वर्ण पात्र इत्यादि का दान भी इस दिन किया जाता है। यह तिथि वसन्त ऋतु के अन्त और ग्रीष्म ऋतु का प्रारम्भ का दिन भी है इसलिए अक्षय तृतीया के दिन जल से भरे घड़े, कुल्हड, सकोरे, पंखे, खडाऊँ, छाता, चावल, नमक, घी, खरबूजा, ककड़ी, शक्कर, साग, इमली, सत्तू आदि घर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान पुण्यकारी माना गया है।
केदार बद्रीनाथ यात्रा प्रारंभ, सर्वार्थ सिद्धि योग
♻️आज की शुभ दिशा -: दक्षिण,पूर्व,दक्षिण-पश्चिम
♻️ दिशा शूल -: उत्तर दिशा की ओर यात्रा करने से बचें, अति आवश्यक होने पर धनिया या तिल खाकर खाकर प्रस्थान करें
आज की ग्रह स्थिति -:
🌷सूर्य -: मेष राशि भरणी नक्षत्र चरण 1में (नक्षत्र स्वामी शुक्र)
🛑मंगल -: कर्क राशि पुष्य नक्षत्र चरण 3 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
🌱 बुद्ध -: मीन राशि रेवती नक्षत्र चरण 1 में (नक्षत्र स्वामी बुद्ध) प्रात: 6/13 से चरण 2 में
🌕गुरु -: वृष राशि मृगशिरा नक्षत्र चरण 2 में (नक्षत्र स्वामी मंगल)
💃 शुक्र -: मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 1 में (नक्षत्र स्वामी गुरु)
🌊 शनि -: मीन राशि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र चरण 1 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
🎥 राहु-: मीन राशि पूर्व भाद्रपद नक्षत्र चरण 4 में (नक्षत्र स्वामी शनि)
🛐केतु-: कन्या राशि उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र चरण 2 में (नक्षत्र स्वामी सूर्य)
🤬राहु काल -: दोपहर 12/30 से 2/00 बजे तक कोई शुभ या नया कार्य न करें
दैनिक लग्न सारणी -:
प्रात: 4/55 तक मीन
6/32 तक मेष
8/27 तक वृष
10/41 तक मिथुन
दोपहर 1/02 तक कर्क
3/19 तक सिंह
सायं 5/35 तक कन्या
7/54 तक तुला
रात्रि 10/13 तक वृश्चिक
12/17 तक धनु
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🙌🙌🙌 जय जय श्री राधे 🙌🙌🙌🙌