
बिजली कर्मचारियों का हड़ताल खत्म
लखनऊ। यूपी सरकार के अधिकारियों और बिजली विभाग के बीच चल रही बैठक ख़त्म। निजी करण का निर्णय स्थगित किया गया।
अब 3 महीने बाद होगी समीक्षा, सुधारों के अनुरूप तय होगी आगे की रचना,
समझौता तैयार हो रहा, उसके बाद हस्ताक्षर होंगे।
संघर्ष समिति संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के हड़ताल के बाद निजीकरण का प्रस्ताव वापस ले लिया गया है। किसी विद्युत निगम का निजीकरण’ नहीं होगा। कार्य सुधार पर विशेष ध्यान देने के लिए निर्देश दिए गए हैं। 15 जनवरी तक कार्य सुधार का स्वरूप सौंपा जाएगा। कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार’ खत्म किया है।
[8:26 PM, 10/6/2020] Dr. Shailendra Srivastava: शैलेंद्र दुबे, संयोजक -विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बताया कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट सब कमेटी जिसमे वित्त मंत्री मा सुरेश खन्ना जी, ऊर्जा मंत्री मा श्रीकान्त शर्मा जी के साथ मुख्य सचिव श्री आर के तिवारी और अपर मुख्य सचिव ऊर्जा भी थे, के बीच हुए समझौते के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार ने वापस ले लिया है।इसके अतिरिक्त पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के विषय में किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव भी विचाराधीन नहीं है। समझौते में लिखा गया है- उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगम की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्यवाही की जाएगी। कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समझौते में स्पष्ट लिखा गया है कि वर्तमान आंदोलन के कारण किसी भी संविदा कर्मी, विद्युत कर्मचारी, अवर अभियंता एवं अभियंता के विरुद्ध किसी प्रकार की उत्पीड़न कार्यवाही नहीं की जाएगी। आंदोलन के दौरान जिन भी स्थानों पर विद्युत कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों,अभियंताओं अथवा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों के विरुद्ध विभिन्न थानों में दर्ज हुए मुकदमों को बिना शर्त वापस लिया जाएगा।इसी के साथ कार्य बहिष्कार आन्दोलन वापस ले लिया गया है।